
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने दावा किया है कि Uddhav Thackeray की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में अटकलों का दौर शुरू हो गया है और संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
शिंदे गुट के नेताओं का कहना है कि कई सांसद वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े चेहरे पक्ष बदल सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की किसी संभावना की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद शिंदे गुट का दावा महाराष्ट्र की सियासत में नई चर्चा का विषय बन गया है।
वहीं इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने बेबाक अंदाज में कहा कि जो लोग जाना चाहते हैं, वे खुशी-खुशी जा सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी सिद्धांतों और विचारधारा के आधार पर आगे बढ़ेगी तथा किसी व्यक्ति विशेष के जाने से संगठन कमजोर नहीं होगा। ठाकरे का यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्होंने संभावित टूट की अटकलों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। पिछले कुछ वर्षों में शिवसेना के भीतर हुए विभाजन और उसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने राज्य की राजनीति को लगातार प्रभावित किया है। ऐसे में यदि किसी भी सांसद द्वारा पक्ष परिवर्तन किया जाता है तो इसका असर केवल पार्टी संगठन पर ही नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।
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