
नई दिल्ली: भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है और मंगलवार को यह डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन ऑल टाइम लो पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 28 पैसे गिरकर 90.43 पर ट्रेड हुआ। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेश और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
इस गिरावट का असर अन्य क्षेत्रों में भी दिख सकता है। खासकर सोना और क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। तेल और धातु के अंतरराष्ट्रीय दामों में तेजी के कारण घरेलू बाजार में इनकी कीमतें महंगी हो सकती हैं। वहीं, इस गिरावट से एक्सपोर्टर्स को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उनके उत्पाद विदेशी मुद्रा में ज्यादा कीमत पर बिकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और विदेशी मुद्रा लेनदेन में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना जरूरी है। वहीं, आम लोगों को भी महंगाई और आयातित वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना चाहिए।
आर्थिक विश्लेषक यह भी बताते हैं कि अगर वैश्विक डॉलर मजबूत रहता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है, तो रुपया और नीचे गिर सकता है। ऐसे में मुद्रा संरक्षण और निवेश की रणनीति बनाना बेहद जरूरी है।

