
46 किलो गांजे के साथ राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का सगा भाई गिरफ्तार; भाजपा के ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ पर लगा बदनुमा दाग, जनता पूछ रही सवाल- क्या यही है नशामुक्ति का संकल्प?
प्रदेश में नशामुक्ति का ढोल पीटने वाली सरकार और संगठन के दावों की हवा उन्हीं की सरकार की एक कद्दावर राज्यमंत्री के परिवार ने निकाल दी है। नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का परिवार एक बार फिर गंभीर अपराधों के चलते कटघरे में है। गांजा तस्करी के काले खेल में पहले बहनोई का नाम आया और अब सगे भाई अनिल बागरी की गिरफ्तारी ने सत्ता के गलियारों में सन्नाटा और जनता के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
46 किलो गांजा और मंत्री का ‘भाई’ मामला सतना जिले का है, जहां रामपुर बाघेलान पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मरौहा गांव में दबिश दी। पुलिस ने धान की बोरियों में छिपाकर रखा गया 46 किलो अवैध गांजा बरामद किया। लेकिन पुलिस के भी होश तब उड़ गए जब मुख्य आरोपी कोई और नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की
राज्यमंत्री का सगा भाई अनिल बागरी निकला। 9.22 लाख रुपये के गांजे और तस्करी में इस्तेमाल 18 लाख की कार के साथ मंत्री के भाई की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि रसूख की आड़ में किस स्तर का अपराध चल रहा था।
यह संयोग है या प्रयोग? : जीजा के बाद अब साला भी नप गया यह मंत्री जी के परिवार का पहला कारनामा नहीं है। जनता अभी भूली नहीं है कि 3 दिसंबर को ही मंत्री प्रतिमा बागरी के बहनोई शैलेंद्र सिंह सोमू को भी गांजा तस्करी के आरोप में यूपी की बांदा जेल भेजा गया था। जांच में अब यह परतें खुल रही हैं कि मंत्री का भाई अनिल अपने जीजा शैलेंद्र के साथ मिलकर नशे का यह सिंडिकेट चला रहा था। जिस परिवार के दो-दो सदस्य गंभीर नशा तस्करी में लिप्त हों, वहां की जनप्रतिनिधि क्या वाकई इन सब से अनजान थीं? यह सवाल अब हर जुबान पर है।
सत्ता की हनक: ‘जबरदस्ती की बात क्यों करते हो?’ शर्मनाक पहलू यह है कि जब इस गंभीर मुद्दे पर मीडिया ने राज्यमंत्री से सवाल किया, तो जवाबदेही स्वीकारने के बजाय उनका लहजा रसूखदार था। उन्होंने कहा- “तुम लोग यह जबरदस्ती की बात क्यों करते हो?” एक तरफ भाई और जीजा जेल जा रहे हैं, और दूसरी तरफ मंत्री जी इसे ‘जबरदस्ती’ बता रही हैं। क्या जनता की सुरक्षा और नशामुक्ति के सवाल मंत्री जी को जबरदस्ती लगते हैं?
कठघरे में सरकार और संगठन यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो ईमानदारी और शुचिता की कसमें खाती है।
- क्या भाजपा नेतृत्व इस पर संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई का साहस दिखाएगा?
- क्या मंत्री पद पर रहते हुए पुलिस निष्पक्ष जांच कर पाएगी?
- क्या यही वह ‘डबल इंजन’ की सरकार है जहां मंत्री के रिश्तेदार ही कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं?
जनता अब समझ रही है कि भाषणों की चमक के पीछे अंधेरा कितना गहरा है। यह गिरफ्तारी एक चेतावनी है कि जब रक्षक के घर में ही भक्षक पल रहे हों, तो समाज सुरक्षित कैसे रहेगा।


