
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित लायंस आई हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गया है, जहां उस पर मानव अंग तस्करी और सरकारी धन की फर्जी वसूली के आरोप लगे हैं। यह मामला तब सामने आया जब स्वास्थ्य विभाग को एक विस्तृत शिकायत प्राप्त हुई, जिसमें अस्पताल द्वारा बिना उचित अनुमति के अंग प्रत्यारोपण करने, फर्जी बिलिंग के जरिए सरकारी योजनाओं से धन निकालने, और मरीजों की जानकारी के बिना उनके अंगों का उपयोग करने जैसे आरोप शामिल थे। इस शिकायत को भारत सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तक पहुंचाया गया, जिसके बाद राज्य के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दिए हैं। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और पूरे मामले की आपराधिक जांच की जाए।
यह मामला न केवल छिंदवाड़ा जिले बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जिस प्रकार से एक निजी अस्पताल पर इतने संवेदनशील और गंभीर आरोप लगे हैं, वह यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी प्रणाली में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है। मानव अंग तस्करी जैसे अपराध न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी गंभीर हनन है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की नैतिकता और प्रशासनिक निगरानी की विफलता का प्रतीक बन सकता है। इस प्रकरण ने आम जनता के मन में यह चिंता पैदा कर दी है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, या फिर कुछ संस्थाएं इसका दुरुपयोग कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच की दिशा और निष्कर्ष यह तय करेंगे कि राज्य सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कितनी गंभीर है।

