
फ़िल्म इंडस्ट्री के जाने-माने actor Dilip के खिलाफ कई साल पहले एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि चलती कार में दो घंटे तक उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ और इस घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया। यह केस लंबे समय तक अदालत में चला और इसमें कुल 261 गवाहों को पेश किया गया।
अभिनेता पर सिर्फ एक नहीं, बल्कि मनोरंजन जगत की कई अन्य महिलाओं—लगभग 30 अभिनेत्री—द्वारा भी अलग-अलग समय पर अनुचित व्यवहार और दुराचार से जुड़े आरोप लगाए गए थे। हालांकि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और कानूनी प्रक्रिया की विस्तृत जांच के बाद न्यायालय ने अभिनेता को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उस स्तर पर साबित नहीं कर सका, जो किसी आपराधिक सज़ा के लिए आवश्यक होता है।
इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आया है—खासतौर पर इसलिए कि इतने अधिक गवाहों और गंभीर आरोपों के बावजूद अदालत का फैसला बरी करने वाला रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों की विश्वसनीयता, बयान दर्ज होने में समय, तकनीकी प्रमाणों की कमी और गवाहों के बयान अदालत के निर्णय को प्रभावित करते हैं। वहीं, फैसले के बाद अभिनेता की कानूनी टीम ने इसे “सच की जीत” बताया, जबकि शिकायतकर्ताओं के समर्थकों ने न्याय व्यवस्था की सीमाओं पर सवाल उठाए।

