
सार
धर्मेंद्र सिंह लोधी|टीकमगढ़ जिला जेल में रक्षाबंधन का पर्व आत्मीयता और सद्भाव के साथ मनाया गया। आनंद विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आनंदम सहयोगी रितु भट्ट ने 50 बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। लंबे समय बाद राखी का आत्मीय स्पर्श पाकर कई बंदी भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों में सकारात्मक सोच, सामाजिक जुड़ाव और समाज की मुख्यधारा से जुड़े रहने की भावना को मजबूत करना रहा।
विस्तार
टीकमगढ़। जिला प्रशासन एवं राज्य आनंद संस्थान, भोपाल के निर्देशन में आनंद विभाग द्वारा जिला जेल में निरुद्ध बंदियों के साथ रक्षाबंधन का पर्व आत्मीयता और सद्भाव के साथ मनाया गया। एक दिवसीय अल्पविराम कार्यक्रम के तहत आयोजित इस आयोजन का उद्देश्य जेल में रह रहे बंदियों के भीतर सकारात्मक सोच विकसित करना और उन्हें समाज से भावनात्मक रूप से जोड़े रखना रहा।
कार्यक्रम के दौरान आनंदम सहयोगी रितु भट्ट ने जिला जेल में निरुद्ध 50 बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। राखी बंधवाते समय कई बंदी भावुक हो गए। लंबे समय बाद मिले इस आत्मीय स्पर्श ने उन्हें परिवार और अपनों की याद दिला दी, जिसके चलते कई बंदियों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
जेल परिसर में कुछ समय के लिए भावनात्मक माहौल बन गया। राखी बांधने के दौरान प्रेम, अपनत्व और भाईचारे की भावना दिखाई दी। आयोजन के माध्यम से बंदियों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सकारात्मक बदलाव और बेहतर जीवन की संभावना हमेशा बनी रहती है।
कार्यक्रम में प्रेम, सद्भाव, मानवता, अपनत्व और आपसी विश्वास का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि बंदियों को समाज से अलग-थलग महसूस कराने के बजाय उनके भीतर सामाजिक जुड़ाव और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना आवश्यक है।
आनंद विभाग के डीपीएल नितिन बबेले ने कहा कि आनंद केवल व्यक्तिगत प्रसन्नता तक सीमित नहीं है। समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ अपनत्व का भाव रखना और दूसरों के जीवन में सकारात्मकता एवं प्रसन्नता लाना भी आनंद का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि जेल में इस तरह के आयोजन बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने और उन्हें समाज से भावनात्मक रूप से जोड़े रखने में मददगार होते हैं। ऐसे कार्यक्रम उन्हें यह महसूस कराने का अवसर देते हैं कि वे भी समाज का हिस्सा हैं और उनके जीवन में सुधार की संभावनाएं मौजूद हैं।
रक्षाबंधन कार्यक्रम में बंदियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की और इस आत्मीय पहल की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान जेल परिसर में सकारात्मक और भावनात्मक वातावरण देखने को मिला।
आयोजन के माध्यम से बंदियों को सम्मान, विश्वास और सामाजिक जुड़ाव का अनुभव कराने का प्रयास किया गया। रक्षाबंधन जैसे पर्व को इस तरह मनाने से बंदियों के भीतर परिवार, समाज और मानवीय रिश्तों के प्रति सकारात्मक भावनाओं को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में जेल अधीक्षक यजुवेंद्र वाघमारे, जेलर ए.के. शुक्ला, जेल शिक्षक सियाराम यादव, आनंद विभाग के डीपीएल नितिन बबेले, आनंदम सहयोगी रितु भट्ट, दिनेश कांत भट्ट एवं विशाल कड़ा उपस्थित रहे।
रक्षाबंधन के मौके पर जिला जेल में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का संदेश देता नजर आया कि भाई-बहन के रिश्ते और मानवीय संवेदनाओं की भावना परिस्थितियों की सीमाओं से परे होती है। बंदियों की कलाई पर बंधी राखी उनके लिए भावनात्मक संबल और सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ने की प्रेरणा का माध्यम बनी।
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