
खजुराहो: विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पश्चिमी समूह मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास बनी सुरक्षा दीवार 17 अगस्त को ढह गई थी। घटना के करीब दो सप्ताह बाद भी सुरक्षा घेरा पूरी तरह बहाल नहीं होने के आरोप हैं, जिससे प्रतिबंधित क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिर 10वीं सदी की महत्वपूर्ण स्थापत्य धरोहर हैं और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। ऐसे में मंदिर परिसर की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीर माना जा रहा है।
दीवार गिरने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय स्तर पर सुरक्षा दीवार के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और कथित अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दीवार ढहने के बाद बने हिस्से से प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर आवाजाही की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि सुरक्षा दीवार का उद्देश्य मंदिर परिसर को सुरक्षित रखना है, तो उसे जल्द से जल्द दुरुस्त क्यों नहीं किया गया।
अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी स्थिति जस की तस?
घटना के करीब दो सप्ताह बाद पुरातत्व विभाग के अधीक्षक अफताब हुसैन ने मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था और क्षतिग्रस्त दीवार को लेकर सवाल उठे। हालांकि, दीवार की मरम्मत कब तक पूरी होगी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तत्काल क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। मामले में संबंधित विभाग का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दीवार गिरने के कारणों की जांच किस स्तर पर की जा रही है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
कैमरा बंद कराने के आरोप से विवाद बढ़ा
घटनास्थल पर कवरेज के दौरान एक अन्य विवाद भी सामने आया। आरोप है कि खजुराहो मंडल में पदस्थ सीनियर कंजर्वेशन असिस्टेंट शिवकांत भारती ने मीडिया कैमरे को बंद करने का प्रयास किया। यह घटना कैमरे में रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है। ब्रांडवाणी न्यूज के कवरेज के दौरान कैमरा बंद कराने के कथित प्रयास को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना जरूरी है।
विश्व धरोहर की सुरक्षा पर जवाबदेही जरूरी
खजुराहो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिहाज से मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण पहचान है। ऐसे में मंदिर परिसर की सुरक्षा दीवार का ढहना और लंबे समय तक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। अब सवाल यह है कि दीवार गिरने के कारणों की तकनीकी जांच कब होगी, निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा और सुरक्षा घेरा पूरी तरह कब बहाल किया जाएगा। विश्व धरोहर की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में प्रशासन और पुरातत्व विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब और प्रभावी कार्रवाई का इंतजार है।
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