
सार
नेपाल में तिब्बत सीमा के पास आई फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है। हजारों लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान में करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी और 14 सैन्य हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं। अब तक 140 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि बड़ी संख्या में भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।
विस्तार
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद आई फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने कई इलाकों को प्रभावित किया है। अधिकारियों के अनुसार आपदा में मरने वालों की संख्या 788 तक पहुंच गई है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
आंध्र प्रदेश सरकार के अनुसार 31 अगस्त की सुबह तक करीब 2,500 से 3,000 लोग लापता या संपर्क से बाहर बताए गए थे। वहीं सुरक्षा बलों ने अब तक 8,700 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालने का दावा किया है।
राहत एवं बचाव अभियान को बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। करीब 20,000 सुरक्षाकर्मी अभियान में जुटे हैं और 14 सैन्य हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। भारी बारिश, भूस्खलन, क्षतिग्रस्त सड़कें और दुर्गम इलाकों के कारण राहत कार्य में लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं।
140 से ज्यादा भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले गए
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए भी अभियान जारी है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 149 से 180 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि करीब 275 से 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें आंध्र प्रदेश से जुड़े तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
हाल ही में तेलुगु तीर्थयात्रियों का एक समूह सुरक्षित काठमांडू पहुंचा। यह समूह तिब्बत से नेपाल की ओर लौट रहा था और बाढ़ के बीच फंस गया था। रिपोर्ट के अनुसार रविवार रात करीब 11 बजे कोदारी चेकपॉइंट के जरिए 144 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें 20 तेलुगु तीर्थयात्री भी शामिल थे। सुरक्षित काठमांडू पहुंचने के बाद उनके भारत लौटने की तैयारी की जा रही है।
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राहत अभियान में मेडिकल टीमें भी तैनात
आपदा प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के साथ चिकित्सा सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार छह विशेष सर्जिकल टीमें आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रही हैं। इसके अलावा भारत की सुरंग बचाव टीम और तकनीकी विशेषज्ञ भी त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के प्रयास में सहयोग कर रहे हैं।
सड़क और पुलों को भारी नुकसान
फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 25 मील से अधिक सड़कें और करीब 40 सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं।
भारी बारिश के कारण कई घाटियां अवरुद्ध हैं। इसके साथ ही तिब्बत में बाढ़ के बाद एक अस्थायी झील बनने से नई चिंता पैदा हो गई है। यदि इसका जलस्तर बढ़ता है तो आसपास के इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
भारतीयों की सुरक्षा पर लगातार नजर
भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारी नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं। खासतौर पर आंध्र प्रदेश से गए तीर्थयात्रियों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का प्रयास है कि संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों की पहचान की जाए और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनके सुरक्षित स्थान का पता लगाया जा सके। राहत कार्यों के साथ-साथ संभावित द्वितीयक आपदाओं को देखते हुए भी सतर्कता बरती जा रही है।
नेपाल में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से पैदा हुई स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। मृतकों की संख्या 788 तक पहुंच चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। हालांकि 8,700 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालना राहत की बड़ी खबर है। भारतीय नागरिकों के लिए भी बचाव अभियान जारी है और 140 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
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