
सार
चित्रकूट। मध्य प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान पर आने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। कई घर और दुकानें पानी एवं कीचड़ से प्रभावित हुई हैं। रामघाट पुल समेत आसपास के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने राहत और सफाई अभियान शुरू कर दिया है, जबकि SDRF की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं।
विस्तार
चित्रकूट। लगातार बारिश के बीच मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। नदी के उफान पर आने के बाद आसपास के घरों और दुकानों में पानी घुस गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी बड़ी मात्रा में कीचड़ और गाद जमा होने से लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं।
बाढ़ के कारण शहर के साथ आसपास के कई गांव भी प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार स्थिति बेहद गंभीर रही। कई परिवारों का घरेलू सामान पानी में बह गया, जबकि अनाज, कपड़े और बच्चों की किताबें भी खराब हो गईं। कुछ स्थानों पर मवेशियों के बह जाने की जानकारी भी सामने आई है।
स्थानीय निवासी मनोज कुमार ने बताया कि रामघाट से हनुमान धारा को जोड़ने वाला पुल क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने आसपास के मलखाना, देलोरा और गोबरिया जैसे गांवों में भी बाढ़ से भारी नुकसान होने की बात कही। उनके मुताबिक कई लोगों के पशु बह गए और घरों में रखा खाद्यान्न भी खराब हो गया।
एक अन्य प्रभावित निवासी सुरेश पाल ने बाढ़ की भयावहता बताते हुए कहा कि उनका परिवार बेघर जैसी स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि घर का अधिकांश सामान बह गया और कुछ सामान बचाने के लिए लोगों को छतों पर रहने को मजबूर होना पड़ा। स्थानीय लोगों ने बाढ़ की तुलना वर्ष 2003 की बाढ़ से करते हुए इसे उससे भी अधिक गंभीर बताया। कई प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें भोजन, पेयजल और जरूरी सामान की तत्काल आवश्यकता है।
राहत और सफाई अभियान जारी
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सतना प्रशासन ने चित्रकूट में राहत और पुनर्बहाली का काम शुरू कर दिया है। सड़क, घर और दुकानों में जमा कीचड़ तथा गाद को हटाने के लिए सफाई अभियान चलाया जा रहा है। स्मार्ट सिटी सतना और सतना नगर निगम की टीमें सफाई कार्य में लगाई गई हैं। सफाई कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड के जवानों की मदद से सड़कों से गाद हटाकर आवागमन और सामान्य सेवाओं को बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रभावित इलाकों में अपने घरों को लौट रहे लोगों के लिए टैंकरों के जरिए पेयजल और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार सतना जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। SDRF की टीमें भी लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।
संवेदनशील इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में जाने की सलाह दी है। बाढ़ से घिरे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF की टीमें तैनात हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती सड़क संपर्क और आवश्यक सेवाओं को सामान्य करना बनी हुई है। कई स्थानों पर कीचड़ और मलबे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद चित्रकूट में पैदा हुई स्थिति ने एक बार फिर नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ प्रबंधन और समय रहते सुरक्षित स्थानों पर लोगों को पहुंचाने की आवश्यकता को सामने रखा है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने, सफाई कराने और बुनियादी सुविधाएं बहाल करने की है।
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