
सार
टीकमगढ़/ दित्यपाल राजपूत: टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत धरमपुरा के ग्राम गैरा में सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी गांव को पक्की सड़क की सुविधा नहीं मिल सकी है। कच्चे और गड्ढों से भरे रास्ते से होकर बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण और सुधार की मांग को लेकर वे विधायक, सरपंच, कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अब ग्रामीणों ने मांग पूरी नहीं होने पर कलेक्ट्रेट के सामने धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
विस्तार
बल्देवगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत धरमपुरा अंतर्गत आने वाला गैरा गांव इन दिनों अपनी बदहाल सड़क व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। गांव तक पहुंचने वाला रास्ता लंबे समय से खराब स्थिति में बताया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क के नाम पर जिस रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह कई जगह से कच्चा, ऊबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें इसी रास्ते से होकर मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। गांव में रहने वाले लोगों के लिए यह केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जरूरी सेवाओं तक पहुंच से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार लगातार गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है, तो गैरा गांव में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा अब तक क्यों नहीं पहुंच सकी?
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
गैरा गांव के ग्रामीणों के अनुसार सामान्य दिनों में भी रास्ते की स्थिति खराब रहती है, लेकिन बारिश के दौरान परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। बारिश का पानी रास्ते पर जमा होने और मिट्टी के कीचड़ में बदल जाने से लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत होती है।
गड्ढों और कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन चालकों को भी संभलकर निकलना पड़ता है। कई बार वाहन फिसलने की स्थिति बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना भी चुनौती बन जाता है।
सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को होती है। ग्रामीणों के मुताबिक किसी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना हो तो खराब रास्ते की वजह से परेशानी और बढ़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जरूरत है, लेकिन वर्षों से उनकी इस जरूरत को नजरअंदाज किया जा रहा है।
आवेदन देते-देते थक गए ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की समस्या को लेकर उन्होंने कई स्तरों पर शिकायत और आवेदन दिए हैं। उनका कहना है कि विधायक से लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच और जिला प्रशासन के अधिकारियों तक समस्या पहुंचाई जा चुकी है।
ग्रामीणों के अनुसार कई बार आवेदन देने के बाद भी सड़क निर्माण या स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि वे एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास जा चुके हैं। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि सड़क की समस्या को लेकर करीब 10 बार तक आवेदन दिए जा चुके हैं।
इसके बावजूद रास्ते की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार उन्हें समस्या के समाधान की उम्मीद रहती है, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी परेशानी और बढ़ती गई।
ग्रामीणों ने उठाए विकास पर सवाल
सड़क की समस्या से परेशान ग्रामीण अब प्रशासन से सीधा सवाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है। ऐसे में गैरा गांव की स्थिति इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर सड़क निर्माण के लिए योजनाएं और बजट उपलब्ध हैं तो गैरा गांव तक उसका लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा है। उनका यह भी सवाल है कि आखिर गांव की सड़क के लिए उन्हें कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव के लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए बाहर जाना पड़ता है। खराब सड़क के कारण समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति देखे और सड़क निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करे।
स्कूली बच्चों की भी बढ़ रही परेशानी
गांव की सड़क की बदहाल स्थिति का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। बच्चों को रोजाना इसी रास्ते से होकर स्कूल जाना-आना पड़ता है। बारिश के दौरान कीचड़ और पानी के कारण बच्चों के लिए रास्ता पार करना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा जैसी जरूरी सुविधा के लिए बच्चों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिलना चाहिए। लेकिन सड़क खराब होने के कारण अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण को केवल विकास कार्य के रूप में न देखकर इसे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरत से जोड़कर देखा जाए।
अब धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत बल्देवगढ़ और जिला प्रशासन से मांग की है कि गैरा गांव की सड़क की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जहां मरम्मत से समस्या का समाधान हो सकता है, वहां सड़क की मरम्मत कराई जाए और यदि रास्ते के लिए पक्की सड़क की आवश्यकता है तो उसका निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधिकारियों को आवेदन देने के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो अब उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
गैरा गांव की सड़क को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। एक तरफ ग्रामीण वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों की चेतावनी के बाद जनपद पंचायत बल्देवगढ़ और जिला प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेगा? क्या गांव की सड़क का निरीक्षण कर निर्माण या मरम्मत के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू होगी?
ग्रामीणों की मांग साफ है-उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क चाहिए। अब देखना होगा कि वर्षों से सड़क की सुविधा का इंतजार कर रहे गैरा गांव के लोगों को यह बुनियादी सुविधा कब तक मिल पाती है।
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