
फ्लाइट ऑपरेशन को लेकर अब सरकार और DGCA ने नियमों को और सख्त कर दिया है। नए निर्देशों के अनुसार, कोई भी उड़ान यदि निर्धारित समय से 15 मिनट से अधिक देर होती है, तो एयरलाइन को तुरंत देरी का वास्तविक कारण बताना अनिवार्य होगा। इस रिपोर्ट को DGCA के साथ साझा करना होगा ताकि तकनीकी खामियों, क्रू की कमी, ऑपरेशनल मिसमैनेजमेंट या एयरपोर्ट-संबंधी समस्याओं की पारदर्शी जांच हो सके। इस कदम से यात्रियों को जानकारी न मिलने, अटकाए जाने या घंटों इंतजार कराने जैसी समस्याओं पर नियंत्रण की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि बढ़ती शिकायतों, लगातार बढ़ रहे एयर-ट्रैफिक और समयपालन में गिरावट को देखते हुए ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं।
इसके साथ ही DGCA ने निगरानी से जुड़े कई प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया है। अब एयरलाइंस को ऑन-टाइम परफॉर्मेंस, फ्लाइट क्रू की उपलब्धता, रिफंड स्थिति, रखरखाव रिकॉर्ड और ग्राउंड ऑपरेशंस की विस्तृत रिपोर्ट नियमित रूप से जमा करनी होगी। एयरपोर्ट्स पर DGCA अधिकारियों की तैनाती भी बढ़ाई जाएगी ताकि देरी के कारणों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सके। उड़ान रद्द होने या देर से चलने की स्थिति में यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट, मुआवजा या भोजन-सुविधा देने जैसी जिम्मेदारियाँ भी और सख्ती से लागू होंगी। सरकार का दावा है कि इस कदम से एयर ट्रैवल में पारदर्शिता बढ़ेगी, यात्रियों का भरोसा मजबूत होगा और एयरलाइंस पर अनुशासन का दबाव बनेगा।


