वन्य जीव संरक्षण कानूनों को ठेंगा दिखाते हुए काले हिरण के मांस की तस्करी का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसमें मुंबई से चौथे तस्कर की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। यह गिरफ्तारी वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत हुई, जिसमें आरोपी को ग्राहकों तक प्रतिबंधित मांस पहुंचाने के आरोप में पकड़ा गया। इससे पहले तीन अन्य तस्करों को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है, जो मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय थे।
गिरफ्तार आरोपी पर आरोप है कि वह शिकारियों से काले हिरण का मांस खरीदकर उसे मुंबई के कुछ खास ग्राहकों तक पहुंचाता था, जो इसे दुर्लभ और “प्रीमियम” मानते थे। यह न केवल वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन है, बल्कि यह जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा भी है। काले हिरण भारत में संरक्षित प्रजाति है, और इसका शिकार पूरी तरह गैरकानूनी है।
जांच एजेंसियों ने आरोपी के पास से मांस के नमूने, पैकिंग सामग्री, मोबाइल रिकॉर्ड और संभावित ग्राहक सूची भी बरामद की है। अब इस नेटवर्क के पीछे के बड़े खिलाड़ियों की तलाश की जा रही है, और वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है।

