
सार
मध्य प्रदेश को नर्मदा नदी के पानी में अपना हिस्सा मिले करीब 47 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक राज्य अपने आवंटित 18.25 मिलियन एकड़-फीट (MAF) में से करीब 10 MAF पानी का ही उपयोग कर पा रहा है। अब सरकार ने नर्मदा जल के अधिकतम उपयोग के लिए करीब 40 परियोजनाओं पर काम तेज किया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2031 तक मध्य प्रदेश अपने हिस्से के पूरे 18.25 MAF पानी का उपयोग करने की स्थिति में आ जाए।
विस्तार
नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा माना जाता है। वर्ष 1979 में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के बाद मध्य प्रदेश को नर्मदा के उपयोग योग्य पानी में सबसे बड़ा हिस्सा मिला था। 12 दिसंबर 1979 को न्यायाधिकरण का अंतिम फैसला केंद्र सरकार के राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। इसमें कुल 28 MAF उपयोग योग्य पानी का बंटवारा किया गया था। मध्य प्रदेश को 18.25 MAF, गुजरात को 9 MAF, राजस्थान को 0.50 MAF और महाराष्ट्र को 0.25 MAF पानी आवंटित किया गया था।
आवंटन के करीब 47 साल बाद भी मध्य प्रदेश अपने हिस्से के पूरे पानी का इस्तेमाल नहीं कर पाया है। अभी करीब 10 MAF पानी का उपयोग हो रहा है। शेष पानी को सिंचाई और अन्य उपयोगों के लिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने परियोजनाओं की बड़ी श्रृंखला तैयार की है।
नर्मदा जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रदेश में करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से 36 परियोजनाओं की लागत 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। आठ और परियोजनाओं के टेंडर अगले एक-दो महीने में जारी किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार करीब 70 प्रतिशत परियोजनाओं में काम तेजी से चल रहा है, जबकि कई परियोजनाओं में 60 से 70 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है।
नर्मदा घाटी से जुड़े अलग-अलग विभागों की करीब 150 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें अकेले नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की 72 जल परियोजनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ प्रदेश को आवंटित नर्मदा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
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परियोजनाओं को चार प्रमुख क्षेत्रों में बांटकर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें अपर नर्मदा जोन, जबलपुर की रानी अवंतीबाई लोधी सागर परियोजना, सनावद की इंदिरा सागर परियोजना और निचली नर्मदा परियोजनाएं शामिल हैं। माइक्रो सिंचाई और ओपन चैनल परियोजनाओं के जरिए उन इलाकों तक भी पानी पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अब तक सिंचाई की सुविधा सीमित रही है।
इंदौर के प्रशासनिक नियंत्रण वाले क्षेत्र में 53 माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं में से 24 पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा 11 ओपन चैनल परियोजनाएं भी पूरी हो गई हैं, जबकि पांच माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं पर काम जारी है। इन योजनाओं के जरिए करीब 31.75 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की योजना में कई बड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। अपर नर्मदा बहुउद्देश्यीय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 7,500 करोड़ रुपये और प्रस्तावित सिंचाई क्षमता 1.05 लाख हेक्टेयर है। राघवपुर बहुउद्देश्यीय परियोजना की लागत करीब 5,300 करोड़ रुपये और सिंचाई क्षमता 68 हजार हेक्टेयर है। वहीं बसानिया बहुउद्देश्यीय परियोजना पर करीब 3,900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इससे 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की योजना है।
इसके अलावा करीब 1,500 करोड़ रुपये की मां रेवा माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना से 45 हजार हेक्टेयर और करीब 1,250 करोड़ रुपये की धार माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना से 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य है।
वर्ष 2024-25 के दौरान नर्मदा कछार में नौ नई परियोजनाओं पर करीब 11,645 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 3.51 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इनमें बहेरीबंद, शहीद ईलाप सिंह, सोनडवा, निवाली, महेश्वर-जानापाव, संधवा, धार, मां रेवा और वड़ादेव संयुक्त उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं।
एनवीडीए के सदस्य इंजीनियर धन्नालाल वर्मा के अनुसार नर्मदा से जुड़ी करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है और आठ परियोजनाओं के टेंडर जल्द जारी किए जाएंगे। उनका कहना है कि यदि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कोई बड़ी बाधा नहीं आती है तो 2031 तक मध्य प्रदेश अपने हिस्से के 18.25 MAF पानी का पूरा उपयोग करने की स्थिति में आ जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल किसी अन्य राज्य की ओर से इस संबंध में आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है।
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