
सार
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले मुंबई के एक इंजीनियर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसे सेवा से जुड़े कुछ लाभ देने की अनुमति दी है। इंजीनियर ने करीब 30 वर्षों तक सेवा की थी और इसी आधार पर कोर्ट ने उसकी सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जारी रखने का रास्ता साफ किया है।
विस्तार
मामला मुंबई महानगरपालिका में कार्यरत एक इंजीनियर से जुड़ा है। उसने अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी। बाद में जांच में उसका ST प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। इसके बाद उसकी नियुक्ति और सेवा को लेकर विवाद खड़ा हुआ और मामला अदालत तक पहुंचा।
सामान्य तौर पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों में कर्मचारी की नियुक्ति रद्द किए जाने के साथ सेवा से जुड़े लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी की लंबी सेवा अवधि और मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राहत देने का फैसला किया।
इंजीनियर ने लगभग 30 वर्षों तक BMC में काम किया। इतने लंबे समय तक सरकारी सेवा करने के बाद उसकी सेवानिवृत्ति का समय आया। इसी दौरान उसके फर्जी ST प्रमाण पत्र का मामला प्रमुखता से सामने आया।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने यह सवाल था कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसे लाभ दिए जा सकते हैं या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कर्मचारी की लंबी सेवा को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने उसे सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन का लाभ देने की अनुमति दी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने फर्जी ST प्रमाण पत्र को सही ठहरा दिया है। राहत इस विशेष मामले की परिस्थितियों और कर्मचारी की लंबी सेवा को ध्यान में रखते हुए दी गई है।
सरकारी नौकरी में आरक्षण का लाभ लेने के लिए गलत या फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल गंभीर मामला माना जाता है। ऐसे मामलों में नियुक्ति रद्द होने के साथ कर्मचारी के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक ऐसे कर्मचारी की स्थिति पर विचार किया गया, जिसने फर्जी ST प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की थी, लेकिन करीब तीन दशक तक सरकारी सेवा में रहने के बाद सेवानिवृत्त हुआ।
अदालत के फैसले से इंजीनियर को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन का लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है। यह फैसला मामले की विशेष परिस्थितियों तक सीमित है और इसे फर्जी जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल को मंजूरी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी नौकरियों में जाति प्रमाण पत्रों के सत्यापन और आरक्षण के लाभ के सही इस्तेमाल से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।
- sc-allows-engineer-with-fake-st-certificate-to-retire-with-pension








