
बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता ऋतिक रोशन ने हाल ही में धुरंधर फ़िल्म को अपनी सराहना दी है — उन्होंने कहा कि उन्होंने फिल्म की कला, अभिनय और सिनेमाई प्रस्तुति को पसंद किया। हालांकि, फिल्म के राजनीतिक रुख और कथानक में दिखाई गई राजनीति से वे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। रोशन के मुताबिक, चाहे अभिनय दमदार हो या परिदृश्य आकर्षक — लेकिन राजनीति अगर दर्शकों के विचारों को प्रभावित करने की कोशिश करती दिखे, तो उन्हें उस हिस्से से दूरी बनानी चाहिए।
ऋतिक रोशन का सुझाव है कि फिल्में मनोरंजन के साथ-साथ सोचने का जरिया होती हैं, इसलिए प्रोड्यूसरों व निर्देशकों को जिम्मेदारी समझकर बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘धुरंधर’ जैसे प्रोजेक्ट में जब राजनीति को दिखाया जाए, तो देखना चाहिए कि वो लोकतंत्र-समर्थक हो, सामाजिक समीकरणों पर सकारात्मक असर डाले, न कि कटु विभाजन या प्रचार का वाहक बने। उनकी इस चुप्पी-भाँच और स्पष्ट बयान ने फिल्म को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ दे दिया है।
अब जब फैन्स, फिल्म समीक्षक और आम दर्शक इस फिल्म को देखेंगे, तो उनके लिए ये प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा कि किसी फिल्म की कला से जोड़कर राजनीति में कितनी विश्वसनीयता होनी चाहिए — और अभिनय-कहानी के बीच की वह रेखा कितनी साफ होनी चाहिए, जिसे ऋतिक जैसी पॉपुलर शख़्सियत ने उठाया है।


