
रीवा/ अरविंद तिवारी: रीवा के संजय गांधी अस्पताल में इलाज की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। झिरिया निवासी युवक आयुष सिंह ने आरोप लगाया है कि कुत्ते के काटने के बाद वह अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचा, लेकिन उपचार के बाद मिले मेडिकल पर्चे में डॉग बाइट की जगह ‘स्नेक बाइट’ दर्ज था। मामला सामने आने के बाद युवक दोबारा अस्पताल पहुंचा, जहां उसे डॉग बाइट का इंजेक्शन लगाए जाने की बात कही गई।
कुत्ते के काटने के बाद पहुंचा था अस्पताल
आयुष सिंह के मुताबिक, बीती शाम उसे एक कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद वह इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल पहुंचा। अस्पताल में उपचार कराने के बाद वह घर लौट आया।
घर पहुंचने के बाद जब उसने अस्पताल से मिला पर्चा देखा तो उसमें ‘स्नेक बाइट’ दर्ज होने की बात सामने आई। इसके बाद युवक ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दोबारा अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी दी।
दो पर्चों में अलग-अलग जानकारी का दावा
युवक का दावा है कि उसके पास उपचार से संबंधित दो पर्चे हैं। इनमें एक में डॉग बाइट और दूसरे में स्नेक बाइट दर्ज है। युवक का कहना है कि बाद में उसे डॉग बाइट का इंजेक्शन लगाया गया।
यही अंतर अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है कि आखिर एक ही मरीज के उपचार संबंधी रिकॉर्ड में अलग-अलग प्रकार के बाइट का उल्लेख कैसे हुआ।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की बात
आयुष सिंह ने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में करने की बात कही है। युवक ने अस्पताल की व्यवस्था और मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी को लेकर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, पर्चे में स्नेक बाइट दर्ज होने की वजह क्या थी और उपचार के दौरान वास्तव में कौन-सा इंजेक्शन दिया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आना बाकी है।
मेडिकल रिकॉर्ड से साफ होगी स्थिति
कुत्ते के काटने के बाद मरीज के रिकॉर्ड में सांप के काटने का उल्लेख होने का दावा सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठ रहे हैं। अब पूरे मामले में मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल प्रबंधन की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि पर्चे में यह अंतर किस वजह से हुआ और मरीज को कौन-सा उपचार दिया गया।
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