
ग्वालियर के एक सरकारी अस्पताल में महिला नर्सिंग ऑफिसर को डॉक्टरों द्वारा धमकाने का मामला सामने आया है, जिसने चिकित्सा संस्थानों में कार्यस्थल की गरिमा और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब उसने डॉक्टरों के निर्देशों पर सवाल उठाया या असहमति जताई, तो उसे धमकी दी गई — “अगर बात नहीं मानी तो कोलकाता जैसा हाल होगा।” यह कथन न केवल डराने वाला है, बल्कि यह कोलकाता के चर्चित अस्पताल विवाद की ओर इशारा करता है, जहां महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आई थीं।
इस मामले में पीड़िता ने अस्पताल प्रशासन और पुलिस को लिखित शिकायत दी है, जिसमें उसने बताया कि कुछ डॉक्टरों द्वारा उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, दबाव बनाया गया और धमकाया गया। शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने आंतरिक जांच समिति गठित की है, और पुलिस ने भी प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक किसी डॉक्टर के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है।
यह घटना दर्शाती है कि स्वास्थ्य संस्थानों में महिला कर्मचारियों के साथ व्यवहार और कार्यस्थल की संस्कृति पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। नर्सिंग स्टाफ, जो कि अस्पताल की रीढ़ होते हैं, उन्हें यदि धमकियों और दबाव में काम करना पड़े, तो यह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि रोगियों की देखभाल की गुणवत्ता पर भी असर डालता है।

