
2026 में भारतीय शेयर बाजार (Indian Capital Markets) में भारी IPO Activity की उम्मीद जताई जा रही है, जहाँ क़रीब 192 कंपनियाँ मिलकर लगभग ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक का फंड रेज़ (raise) कर सकती हैं। यह आंकड़ा इस साल के ₹1.77 लाख करोड़ IPO जुटाने के रिकॉर्ड के मुकाबले और भी ज़्यादा है, जोकि 2025 में नए लिस्टिंग बूम के चलते हासिल हुआ था। विशेषज्ञों के मुताबिक अगले साल के IPO Pipeline में बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों की लिस्टिंग शामिल होगी, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी और बाजार की गहराई बढ़ सकती है।
नज़दीकी प्रस्तावों में NSE (National Stock Exchange) की संभावित लिस्टिंग, और प्रमुख टेक कंपनियों जैसे Jio Platforms और PhonePe के IPO की अटकलें शामिल हैं, जोकि बाजार को और ऊर्जा प्रदान कर सकती हैं। इन बड़े IPOs से न केवल निवेशकों का ध्यान खिंचेगा बल्कि बाज़ार पूंजीकरण और लिक्विडिटी पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्रों के अलावा टेक, ई-कॉमर्स और ऊर्जा जैसे सेक्टर्स के कई बड़े नाम अगली बार पब्लिक ऑफरिंग लाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि 2026 का IPO Calendar 2025 से कहीं बड़ा साबित हो सकता है क्योंकि कंपनियाँ अधिक पूंजी जुटाने के लिए सार्वजनिक बाजारों की ओर आकर्षित हो रही हैं। बढ़ती कर्ज की लागत और निवेशकों के लाभांश की मांग के बीच कंपनियों के पास IPO को फ़ंडिंग का एक आकर्षक विकल्प माना जा रहा है। अगर यह अनुमान सच होता है, तो 2026 के IPO बाजार को उत्कृष्ट अवसर, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और निवेशकों के लिए विविध विकल्प प्रदान करने वाला साल कहा जा सकता है।

