
मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों को अदालत ने 5 वर्ष की सजा सुनाई है, जिससे डिजिटल वित्तीय अपराधों पर सख्ती का स्पष्ट संकेत गया है। यह मामला तब सामने आया जब बैंक अधिकारियों ने संदिग्ध ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस को सूचना दी। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने नकली पहचान पत्र, पते और आय प्रमाण पत्र बनाकर विभिन्न बैंकों से क्रेडिट कार्ड हासिल किए और फिर उनका दुरुपयोग कर लाखों रुपये की खरीदारी की।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से फर्जी दस्तावेज, कार्ड मशीन, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए थे, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान यह माना कि यह अपराध पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से किया गया, और इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को धोखा देकर आर्थिक लाभ उठाना था।
अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं के तहत दोषी ठहराया और उन्हें 5 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल लेन-देन के बढ़ते युग में ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि आम जनता का भरोसा बैंकिंग प्रणाली पर बना रहे।

