
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1984 के दंगों में संपत्ति गंवाने वाली एक विधवा से 7.23 लाख रुपये की वसूली के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिला ने पहले मिली राहत राशि की जानकारी अपने आवेदन में दी थी। कोर्ट ने मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए राज्य को 50 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1984 के दंगा पीड़ित परिवार से जुड़ी एक मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने सीहोर के अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा जारी 7.23 लाख रुपये की रिकवरी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया। यह वसूली करीब एक साल पहले दी गई मुआवजा राशि को लेकर की जा रही थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर ने की।
महिला पर पहले मिली राहत छिपाने का आरोप लगा था
मामले के अनुसार, महिला ने 9 मई 2013 को 1984 के दंगों में संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजे का दावा किया था। आवेदन में उसने पहले मिली 5,000 रुपये की अंतरिम राहत और केंद्र सरकार से मिली 40,000 रुपये की सहायता का उल्लेख किया था।
रिकॉर्ड के मुताबिक, महिला ने पहले मिल चुकी राशि को अपने दावे में समायोजित भी किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने दिसंबर 2013 में 7,23,800 रुपये के मुआवजे की राशि आवंटित की और भुगतान किया गया।
हालांकि, सितंबर 2014 में कलेक्टर कार्यालय की ओर से नोटिस जारी कर आरोप लगाया गया कि महिला ने पहले मिली राशि की जानकारी छिपाई थी। महिला ने जवाब देकर बताया कि उसने अपने आवेदन में पहले मिली रकम का स्पष्ट उल्लेख किया था। इसके बावजूद अतिरिक्त कलेक्टर ने 18 सितंबर 2014 को वसूली प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
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हाईकोर्ट ने वसूली आदेश किया रद्द, 50 हजार रुपये देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच के बाद कहा कि पहले मिली एक्स-ग्रेशिया सहायता अपने आप में बाद में संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजा मांगने से नहीं रोकती। कोर्ट ने दोनों राशियों के स्वरूप में अंतर बताया। उसके अनुसार, एक्स-ग्रेशिया तत्काल राहत के तौर पर दी गई सहायता थी, जबकि मुआवजा संपत्ति के आकलित नुकसान के आधार पर देय राशि थी।
कोर्ट ने माना कि महिला पर राशि छिपाने का आरोप रिकॉर्ड से साबित नहीं होता। इसके आधार पर 18 सितंबर 2014 का रिकवरी सर्टिफिकेट और उससे जुड़ी आगे की कार्रवाई रद्द कर दी गई।
कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी टिप्पणी की और कहा कि मामले में उचित तथ्य-जांच और संवेदनशीलता की कमी रही। महिला को लंबे समय तक चली कार्रवाई से हुई मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए राज्य को 50 हजार रुपये बतौर लागत और मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।
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