
केंद्र सरकार ने प्रगति-50 पहल के तहत देश के 24 राज्यों के 50 शहरों को स्वच्छता के मॉडल शहर के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश से प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, आगरा, अयोध्या और मथुरा को इसमें शामिल किया गया है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने पहल की शुरुआत करते हुए चयनित शहरों की प्रगति की हर दो महीने में समीक्षा करने की बात कही है।
स्वच्छता के उच्च मानकों वाले मॉडल शहर
स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब शहरों को सिर्फ नियमित साफ-सफाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वच्छता के उच्च मानकों वाले मॉडल शहर के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसी दिशा में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रगति-50 पहल शुरू की है। इसके तहत देश के 24 राज्यों के 50 शहरों का चयन किया गया है।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को इस पहल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि चयनित शहरों को स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के अन्य शहरों के लिए उदाहरण बनना होगा। इन शहरों की प्रगति की हर दो महीने में समीक्षा की जाएगी। हालांकि, अभी यह समयसीमा तय नहीं की गई है कि सभी चयनित शहरों को कब तक स्वच्छ आदर्श शहर के रूप में विकसित किया जाना है।
यूपी के छह शहर अभियान में शामिल
प्रगति-50 में उत्तर प्रदेश के छह प्रमुख शहरों को जगह मिली है। इनमें प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, आगरा, अयोध्या और मथुरा शामिल हैं। इन शहरों का चयन उनके प्रमुख शहरी, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में यहां स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को बेहतर करना अभियान का अहम हिस्सा होगा।
सिर्फ सफाई नहीं, कचरा और पानी का भी होगा प्रबंधन
इस पहल में शहरों को केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई तक सीमित नहीं रहना होगा। ठोस कचरा प्रबंधन, उपयोग किए गए पानी का प्रबंधन, स्वच्छता और नागरिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में भी परिणाम आधारित सुधार करने होंगे।
शहरों में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर रहेगा, जिन्हें लंबे समय तक प्रभावी तरीके से चलाया जा सके। इसके लिए तकनीक आधारित निगरानी और तय मानकों के आधार पर प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।
नगर निकायों की होगी अहम भूमिका
चयनित शहरों को स्वच्छ आदर्श शहर बनाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से संबंधित नगरीय निकायों की होगी। स्थानीय निकायों को नियमित सफाई व्यवस्था के साथ ऐसे नए प्रयोग और व्यवस्थाएं लागू करनी होंगी, जिन्हें दूसरे शहर भी अपनाने लायक मानें।
इसके साथ ही मंत्रालय के अधिकारियों को अलग-अलग शहरों की जिम्मेदारी दी जाएगी। अधिकारी नियमित निगरानी और मार्गदर्शन के जरिए यह देखेंगे कि निर्धारित लक्ष्यों पर कितना काम हुआ है।
हर दो महीने में प्रगति की समीक्षा
प्रगति-50 की खास बात यह है कि चयनित शहरों की प्रगति की नियमित निगरानी होगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खुद हर दो महीने में समीक्षा बैठक करेंगे। इससे शहरों की प्रगति पर लगातार नजर रखने और सामने आने वाली समस्याओं के समाधान की व्यवस्था बनाने का लक्ष्य है।
सरकार ने इस पहल में KPI आधारित कार्रवाई और तकनीक आधारित निगरानी को प्रमुख आधार बनाया है। यानी शहरों के प्रदर्शन का आकलन केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि निर्धारित मानकों और परिणामों के आधार पर किया जाएगा।
2016 में शुरू हुआ था स्मार्ट सिटी मिशन
शहरी विकास के क्षेत्र में केंद्र सरकार इससे पहले 2016 में स्मार्ट सिटी मिशन शुरू कर चुकी है। इसके तहत 2018 तक देश के 100 शहरों को शामिल किया गया था। स्मार्ट सिटी मिशन में भी राज्य सरकारों और नगरीय निकायों की अहम भूमिका रही थी।
अब प्रगति-50 के जरिए खास तौर पर स्वच्छता और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य चयनित शहरों में ऐसे स्थायी मॉडल तैयार करना है, जिन्हें आगे दूसरे शहरों में भी अपनाया जा सके।
प्रयागराज और वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के छह शहरों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन शहरों में धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में स्वच्छता के साथ कचरा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था मजबूत करना स्थानीय प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।
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