
दिल्ली हाईकोर्ट ने डीयू छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को चुनौती देने वाली NSUI उम्मीदवार विजय शंकर मीणा की याचिका बुधवार को खारिज कर दी। याचिका में चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता और अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि केवल तस्वीरों के आधार पर चुनाव में पक्षपात या प्रचार साबित नहीं होता।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने NSUI उम्मीदवार विजय शंकर मीणा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें चुनाव परिणामों को चुनौती देते हुए चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप लगाए गए थे। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने की।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय और कॉलेजों के कुछ अधिकारी, प्रिंसिपल, प्रोफेसर तथा चुनाव अधिकारियों ने कथित तौर पर चुनाव के दौरान ABVP उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया। इन आरोपों के समर्थन में याचिका में कुछ तस्वीरों का भी हवाला दिया गया था।
तस्वीरों को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तस्वीरों को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि केवल किसी उम्मीदवार के साथ प्रोफेसर या चुनाव अधिकारी की तस्वीर होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति ने चुनाव प्रचार किया या पक्षपात किया।
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि पेश की गई तस्वीरों में तारीख और अन्य जरूरी विवरण स्पष्ट नहीं थे। ऐसे में उनके आधार पर चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं था।
Lyngdoh Committee का भी दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से चुनाव संबंधी नियमों और Lyngdoh Committee की सिफारिशों का भी हवाला दिया गया। अदालत ने कहा कि याचिका में जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, उनके समय और तारीख से जुड़े पर्याप्त तथ्य नहीं दिखाए गए हैं। इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले भी DUSU चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में कई याचिकाएं सामने आई थीं। 16 सितंबर को अदालत ने NSUI और ABVP जैसे राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवारों की चुनाव में भागीदारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की थी। हालांकि, अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय और मुख्य चुनाव अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि चुनाव में राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की अनुचित भागीदारी या हस्तक्षेप न हो।
चुनाव प्रक्रिया पर पहले भी हुई थी सुनवाई
DUSU चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को भी चुनावी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले की सुनवाई की थी। उस मामले में अदालत ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने पर भी रोक लगाई थी।
अब चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली NSUI उम्मीदवार की याचिका खारिज होने के बाद मौजूदा नतीजों पर इस याचिका के जरिए हस्तक्षेप नहीं हुआ है। अदालत के फैसले में मुख्य रूप से यह बात सामने आई कि चुनाव में कथित पक्षपात के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और स्पष्ट साक्ष्य जरूरी हैं।
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