
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह करीब 1000 किलोमीटर लंबी सनातन स्वाभिमान यात्रा की तैयारी में जुटे हैं। विजयादशमी के दिन 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल से अयोध्या के राम मंदिर तक प्रस्तावित यह पदयात्रा धार्मिक आस्था, पारदर्शिता और चंदे-चढ़ावे के इस्तेमाल से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा में है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि यात्रा किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य धर्म और आस्था के नाम पर कथित अनियमितताओं के खिलाफ जनजागरण, पारदर्शिता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना है।
यात्रा के रास्ते में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से गुजरने की योजना है। करीब 1000 किलोमीटर की दूरी को देखते हुए यात्रा में गांवों, कस्बों और धार्मिक स्थलों पर रुकने तथा स्थानीय लोगों से संवाद करने की योजना बताई गई है। दिग्विजय सिंह की उम्र करीब 80 वर्ष होने के कारण उनकी शारीरिक तैयारी को लेकर भी चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे नियमित वॉक और स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों पर ध्यान दे रहे हैं। यात्रा का सबसे प्रमुख मुद्दा राम मंदिर से जुड़े चंदे और चढ़ावे की कथित गड़बड़ियों को लेकर उठाए गए सवाल हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा है कि श्रद्धालुओं से मिले चंदे और चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और आस्था से जुड़े धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे स्वयं राम मंदिर आंदोलन से पूरी तरह अलग नहीं रहे हैं और 1988-89 के राम शिला पूजन अभियान में उनकी भागीदारी रही थी। यात्रा के दौरान गांवों और स्थानीय कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कांग्रेस के लिए भी जनसंपर्क का माध्यम बन सकता है। हालांकि यात्रा को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।
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