
संसद के दोनों सदनों में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ जैसे नारे का मुद्दा उठा। सत्ता पक्ष ने इसे प्रधानमंत्री के खिलाफ घृणित, हिंसक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस नारे की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री की मौत की कामना करना न केवल शर्मनाक है बल्कि यह राजनीतिक मर्यादाओं को भी तार-तार करता है। इस मुद्दे पर सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। उनका आरोप है कि ऐसे नारे विपक्ष की राजनीति की गिरती हुई भाषा और सोच को दर्शाते हैं। नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसा और मौत की धमकी जैसी भाषा अस्वीकार्य है। सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की गरिमा से जोड़ते हुए गंभीर मुद्दा बताया।
विपक्ष की ओर से इस आरोप पर सफाई दी गई, लेकिन सत्ता पक्ष ने माफी की मांग पर अपना रुख बनाए रखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय राजनीति में भाषा और आचरण की सीमाएं टूटती जा रही हैं।

