
क्सल प्रभावित इलाकों में विकास की राह हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के एक BJP नेता ने बड़ा चैलेंज स्वीकार किया। छत्तीसगढ़ के कुख्यात नक्सलगढ़ इलाके तक आखिरकार सड़क पहुंच गई, जबकि इससे पहले PWD और BRO जैसी एजेंसियां भी पीछे हट चुकी थीं। हालात इतने कठिन थे कि सड़क निर्माण के लिए 17 बार टेंडर निकाले गए, लेकिन हर बार कोई ठेकेदार आगे नहीं आया।
बताया जा रहा है कि लगातार नक्सली धमकियों, सुरक्षा जोखिम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परियोजना वर्षों तक अटकी रही। ऐसे में BJP नेता ने खुद मोर्चा संभाला और स्थानीय प्रशासन व सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से काम को आगे बढ़ाया। इस पहल का नतीजा यह रहा कि नक्सलगढ़ तक सड़क बन पाई, जिसे लंबे समय से असंभव माना जा रहा था। सड़क बनने से न सिर्फ आवाजाही आसान हुई, बल्कि सरकारी पहुंच भी इन इलाकों तक मजबूत हुई।
सिर्फ सड़क ही नहीं, इस पहल का असर बीजापुर और सुकमा जैसे अति नक्सल प्रभावित जिलों में भी देखने को मिला। जानकारी के अनुसार, इन इलाकों में अंदर तक घुसकर पुलिस थानों का निर्माण कराया गया, जिससे सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ी और नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में विकास और सुरक्षा के मॉडल को मजबूत करता है और स्थानीय लोगों के भरोसे को भी बढ़ाता है।

