
जहां भारत में शेयर बाजार हाल के दिनों में मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते दबाव में रहा, वहीं चीन का शेयर बाजार 10 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 1.2% की बढ़त के साथ 4,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बंद हुआ, जबकि ब्लू-चिप CSI300 इंडेक्स और शेन्ज़ेन कंपोनेंट में भी उल्लेखनीय तेजी देखी गई।
इस तेजी के पीछे मुख्य कारण है अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते की उम्मीदें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित बैठक से पहले दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने एक फ्रेमवर्क डील पर सहमति जताई है, जिससे अमेरिकी टैरिफ और चीनी रेयर अर्थ एक्सपोर्ट कंट्रोल पर नरमी आने की संभावना है। निवेशकों को यह संकेत मिला कि ट्रेड वॉर की तीव्रता घट सकती है, जिससे बाजार में सकारात्मक भाव पैदा हुआ।
इसके अलावा, चीन ने हाल ही में रेयर अर्थ उत्पादन तकनीक पर एक्सपोर्ट कंट्रोल की घोषणा की है, जिससे देश की माइनिंग और टेक्नोलॉजी कंपनियों को मजबूती मिली। Zijin Mining, China Northern Rare Earth, और Zhejiang Huayou Cobalt जैसे स्टॉक्स में 6% से 10% तक की तेजी देखी गई। साथ ही, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी वैश्विक रुझानों के चलते निवेशकों ने खरीदारी की, जिससे ZTE, Foxconn Industrial, और Giga Device Semiconductor जैसे शेयरों में 2% से 9% तक की उछाल आई।

