
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में संसद ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है, जिससे सिगरेट, तंबाकू और उससे बने उत्पादों पर टैक्स में भारी वृद्धि की जाएगी। यह कदम GST कंपेंसेशन सेस खत्म होने के बाद लागू होगा और इसका मकसद टैक्स की दर को पहले जैसे स्तर पर बनाए रखना है।
इस संशोधन के तहत अब सिगरेट के लिए उत्पाद शुल्क लगभग ₹2,700 से ₹11,000 प्रति 1,000 स्टिक्स तक होगा, जो पहले ₹200–₹735 प्रति 1,000 के बीच था। इसी तरह तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों — जैसे चबाने वाला तंबाकू, हुक्का तंबाकू, जर्दा आदि — पर भी शुल्क कई गुना बढ़ाया गया है।
📈 टैक्स वृद्धि का उद्देश्य
फायनेंस मंत्रालय के अनुसार यह कदम केवल राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य नीति को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य यह है कि हानिकारक उत्पादों की खपत को कम करना और लोगों को तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से बचाना है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह टैक्स दरें WHO जैसी वैश्विक सिफारिशों के अनुरूप हैं।
💡 सरकार का स्पष्टीकरण
वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि यह कोई नया अतिरिक्त कर नहीं, बल्कि मौजूदा सिस्टम में बदलाव है ताकि GST कंपेंसेशन सेस खत्म होने के बाद भी टैक्स का बोझ कम न हो। टैक्स से होने वाली आमदनी को राज्यों के साथ भी साझा किया जाएगा।
💸 कीमतों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की खुदरा कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे इन उत्पादों की खरीद महंगी होगी। इससे कुछ हद तक उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ सकता है, और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह खपत को भी कम करेगा।
📊 स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
- स्वास्थ्य लाभ: उच्च टैक्स से तंबाकू उत्पादों का उपयोग घट सकता है, जिससे स्वास्थ्य जोखिमों में कमी आ सकती है।
- राजस्व संग्रह: सरकार के राजस्व में इज़ाफा होगा, जिसका हिस्सा राज्यों को दिया जाएगा।
- उपभोक्ता खर्च: कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ सकता है।

