
भोपाल के लिए 21 दिसंबर 2025 का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है। करीब 16 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भोपाल मेट्रो परियोजना अब हकीकत की ओर बढ़ रही है। वर्षों तक कागज़ों और योजनाओं में अटकी रही मेट्रो अब शहर के यातायात तंत्र को नई दिशा देने की तैयारी में है।
भोपाल मेट्रो की आधारशिला वर्ष 2009 में रखी गई थी, लेकिन इसके बाद परियोजना कई बार रफ्तार पकड़ने और थमने के दौर से गुज़री। डीपीआर, वर्क ऑर्डर, टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी अड़चनों के कारण काम में देरी होती रही। कोविड-19 महामारी ने भी परियोजना की गति को प्रभावित किया, जिससे निर्माण कार्य लंबे समय तक बाधित रहा।
अब अधिकारियों के अनुसार मेट्रो परियोजना को नई गति और प्राथमिकता दी गई है। भोपाल मेट्रो का पहला चरण 7.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर शुरू किया जाएगा, जिसमें कुल 8 स्टेशन शामिल होंगे। यह कॉरिडोर शहर के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ेगा और दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत देगा।
भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन की कुल लंबाई लगभग 30.95 किलोमीटर होगी। भविष्य में यह लाइन शहर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हुए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करेगी। मेट्रो ट्रेन आधुनिक तकनीक से लैस होगी, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, लिफ्ट, एस्केलेटर, स्मार्ट टिकटिंग और सुरक्षा व्यवस्था शामिल रहेगी।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेट्रो का संचालन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में ट्रेनें सीमित दूरी तक चलेंगी, लेकिन जैसे-जैसे नेटवर्क का विस्तार होगा, मेट्रो की आवृत्ति और यात्रियों की संख्या दोनों में वृद्धि होगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार, भविष्य में मेट्रो हर 10 मिनट में एक ट्रेन उपलब्ध करा सकेगी।
अधिकारियों का कहना है कि भोपाल मेट्रो परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरी तरह पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने के बाद न केवल ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि शहर की कनेक्टिविटी, पर्यावरण और आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। भोपाल मेट्रो को शहर के आधुनिक विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

