
मध्य प्रदेश के एक जिले से आई इस खबर ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। एक 11 साल की बच्ची का शव उसके घर में फंदे से लटका मिला, और शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसे सौतेली मां और पिता बेल्ट से पीटते थे। पड़ोसियों और स्कूल के शिक्षकों ने पहले भी बच्ची के शरीर पर चोट के निशान देखे थे, लेकिन परिवार की चुप्पी और सामाजिक दबाव के चलते मामला दबा रहा। अब जब बच्ची की मौत हुई है, तो पुलिस ने इसे संदिग्ध मानते हुए सौतेली मां और पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, बच्ची की मौत आत्महत्या प्रतीत होती है, लेकिन जिस तरह से घरेलू हिंसा के संकेत मिले हैं, उससे यह मामला हत्या या उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की दिशा में भी जांचा जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले पर गहरे निशान, और शरीर पर पुराने चोटों के संकेत मिले हैं। साथ ही, घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जिससे पुलिस को शक है कि यह पूर्व नियोजित हिंसा का परिणाम हो सकता है।
यह घटना सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं, बल्कि यह सवाल उठाती है कि बच्चों की घरेलू सुरक्षा, स्कूलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था और समाज की संवेदनशीलता कितनी कमजोर है। क्या स्कूलों को ऐसे मामलों में प्रोटोकॉल के तहत पुलिस को सूचित करना चाहिए? क्या पड़ोसियों की चुप्पी भी अपराध की भागीदार बनती है? यह मामला अब बाल संरक्षण आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संज्ञान में भी लाया गया है, और उम्मीद है कि दोषियों को जल्द सजा मिलेगी।

