
मध्य प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर उजागर हुई है। हाल ही में सामने आए मामलों में देखा गया कि गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाने की जिम्मेदारी परिजनों को ही उठानी पड़ रही है, क्योंकि वार्ड बॉय या अस्पताल स्टाफ मदद करने से इनकार कर देते हैं। यह नजारा न केवल व्यवस्थागत लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि बीमार और असहाय मरीजों के प्रति संवेदनहीनता का भी प्रतीक बन गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई बार मरीजों को आपातकालीन वार्ड या ऑपरेशन थिएटर तक ले जाने के लिए परिजन खुद स्ट्रेचर खींचते हैं, जबकि अस्पताल में स्टाफ की मौजूदगी के बावजूद कोई सहयोग नहीं मिलता। कुछ मामलों में तो महिलाओं और बुजुर्गों को भी यह जिम्मेदारी निभानी पड़ी, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर भी असर पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि सभी अस्पतालों को निर्देश दिए जाएंगे कि स्ट्रेचर सेवा में स्टाफ की जिम्मेदारी तय की जाए, और वार्ड बॉय की ड्यूटी चार्ट सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। साथ ही, सीसीटीवी निगरानी और शिकायत पोर्टल को भी सक्रिय किया जाएगा ताकि ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग और कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

