
सरकार ने ब्राउनफील्ड शिपयार्ड विस्तार को लेकर बड़ा नीति निर्णय लिया है। नए प्रावधानों के तहत शिपयार्ड्स को मिलने वाली सरकारी फंड सहायता की सीमा ₹1,500 करोड़ तय की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य मौजूदा शिपयार्ड्स की क्षमता बढ़ाना, आधुनिक तकनीक को अपनाना और घरेलू जहाज निर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाना है, जबकि सार्वजनिक धन के उपयोग पर स्पष्ट नियंत्रण भी रखा जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, यह फंडिंग ढांचा भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है। ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स—जहां मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होता है—को प्राथमिकता देने से समय और लागत दोनों में बचत होगी। सहायता का उपयोग ड्राई डॉक विस्तार, उन्नत मशीनरी, ग्रीन टेक्नोलॉजी और स्किल अपग्रेडेशन में किया जा सकेगा।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कैप तय होने से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और परियोजनाओं की वित्तीय अनुशासनशीलता सुधरेगी। साथ ही, यह नीति घरेलू शिपबिल्डिंग वैल्यू-चेन को मजबूत कर रोजगार सृजन और आयात निर्भरता कम करने में मदद करेगी। आने वाले महीनों में पात्रता मानदंड और चरणबद्ध रिलीज़ से जुड़े दिशा-निर्देश जारी होने की उम्मीद है।

