
यात्रा के दौरान एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, होटल लॉबी या कैफे में मौजूद पब्लिक USB चार्जिंग पोर्ट्स सुविधा तो देते हैं, लेकिन इनमें साइबर रिस्क छुपा हो सकता है। साइबर एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इन पोर्ट्स के जरिए ‘जूस जैकिंग’ जैसे हमले संभव हैं, जहां चार्जिंग के बहाने डिवाइस में मैलवेयर डाला जा सकता है या डेटा एक्सेस किया जा सकता है। खासकर अनजान पोर्ट्स पर फोन लगाते ही कॉन्टैक्ट्स, फोटो, OTP और बैंकिंग ऐप्स तक खतरा बढ़ जाता है।
खतरे की वजह यह है कि USB केबल पावर के साथ डेटा भी ट्रांसफर कर सकता है। अगर पोर्ट से छेड़छाड़ हुई हो, तो बैकग्राउंड में डेटा चोरी या स्पाइवेयर इंस्टॉल होने का जोखिम रहता है। साइबर सुरक्षा एजेंसियां सलाह देती हैं कि यात्रा के समय चार्जिंग-ओनली केबल, पावर बैंक या वॉल सॉकेट + अपना चार्जर इस्तेमाल करें। जरूरत पड़े तो फोन में डेटा ट्रांसफर परमिशन बंद रखें और अनजान पॉप-अप्स से बचें।
डिजिटल सेफ्टी के लिहाज से छोटे कदम बड़ा नुकसान रोक सकते हैं। सार्वजनिक जगहों पर चार्ज करते समय फोन लॉक रखें, ऑटो-कनेक्ट फीचर्स बंद करें और चार्जिंग के बाद डिवाइस को मैलवेयर स्कैन करना भी उपयोगी है। यात्रा के दौरान सुविधा के चक्कर में सुरक्षा से समझौता न करें—क्योंकि एक चार्ज आपके डेटा की कीमत बढ़ा सकता है।

