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बंगाल में ‘खेला’ शुरू! मोहन भागवत के चक्रव्यूह में फंसीं दीदी? 5.82 लाख वोटर आउट, क्या ढह जाएगा ममता का अभेद्य किला?

ममता के गढ़ में RSS कीसर्जिकल स्ट्राइक‘, 5.82 लाख वोटर्स का सफाया!

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति इस वक्त उस मुकाम पर खड़ी है जहाँ एक तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत का चार दिवसीय महामंथन चल रहा है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग की एक कार्रवाई ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य मेंसिस्टमैटिक इंवेस्टिगेशन एंड रेक्टिफिकेशन‘ (SIR) के तहत 5.82 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

भागवत का मिशन बंगाल: संघ की सांगठनिक घेराबंदी

RSS प्रमुख मोहन भागवत अपने चार दिवसीय दौरे पर बंगाल में हैं। बंद कमरों में हो रही यह सांगठनिक चर्चा महज एक बैठक नहीं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करने का मास्टर प्लान मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो भागवत जमीनी स्तर पर स्वयंसेवकों कोएक्टिव मोडमें ला रहे हैं। संघ का लक्ष्य स्पष्ट हैममता बनर्जी के अभेद्य किले में सेंध लगाना और जनजन तक अपनी विचारधारा को पहुँचाना।

6 लाख वोटर्सगायब‘—मरे हुए और गैरमौजूद मतदाताओं पर गाज

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग द्वारा हटाए गए 5.82 लाख मतदाता चुनाव के नतीजों को पलटने की ताकत रखते हैं। इनमें से कई मृत पाए गए तो कई लंबे समय से लापता थे। विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि इन्हींफर्जीवोटरों के सहारे सत्ताधारी दल चुनाव जीतता रहा है। अब जब ये नाम हट चुके हैं, तो ममता दीदी केवोट बैंकसमीकरण में बड़ी दरार पड़नी तय है।

क्या ढह जाएगा दीदी का किला?

सवाल बड़ा है: क्या मोहन भागवत दीदी का गढ़ रहने देंगे या उसे उखाड़ फेंकेंगे?

  1. सांगठनिक मजबूती: संघ अपनी शाखाओं के जरिए ग्रामीण बंगाल में पैठ बना रहा है।
  1. वोटर लिस्ट की सफाई: फर्जी वोटरों का हटना सीधे तौर पर निष्पक्ष चुनाव की ओर इशारा है, जो दीदी के लिए चुनौती बन सकता है।
  1. जनता का मूड: भ्रष्टाचार और कानूनव्यवस्था के मुद्दों पर घिरी सरकार के लिए भागवत का यह दौराआग में घीका काम कर रहा है।

बंगाल की धरती पर इस बार संघर्ष आरपार का है। एक तरफ ममता बनर्जी का अटूट आत्मविश्वास है, तो दूसरी तरफ मोहन भागवत कीखामोश रणनीति 6 लाख वोटरों के हटने के बाद अब चुनावी बिसात नए सिरे से बिछाई जा रही है। क्या यह बंगाल मेंपरिवर्तनका संकेत है?

gaurav
Author: gaurav

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