
भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत और प्रशासन के गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा जोरों पर है—क्या प्रदेश को विकास के शिखर पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी ‘कोर टीम‘ में उन चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी देंगे, जो अपनी कार्यशैली के लिए ‘बुलेट ट्रेन‘ माने जाते हैं? बात हो रही है कौशलेंद्र विक्रम सिंह, आशीष सिंह, अनुराग चौधरी और तरुण राठी जैसे 2010 बैच के उन धाकड़ आईएएस अधिकारियों की, जिन्होंने अपनी कड़क कार्यप्रणाली से साबित किया है कि अगर नीयत साफ हो, तो सरकारी खजाना भरने में देर नहीं लगती।
राजस्व का ‘माइनिंग मॉडल‘ और इन अधिकारियों का जलवा
बीते एक साल (2023 के मध्य से 2024 तक) में मध्यप्रदेश के माइनिंग (खनन) और अन्य राजस्व विभागों में जो ‘बूम‘ देखा गया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब संभव हुआ उन अधिकारियों की बदौलत, जो फाइलें अटकाने में नहीं, बल्कि फैसला लेने में विश्वास रखते हैं।
लेकिन सवाल वही है—क्या सरकार इन ‘रिजल्ट ओरिएंटेड‘ अफसरों को फ्रंट लाइन पर रखेगी या फिर इन्हें ‘लूप लाइन‘ के बैक डोर में धकेल दिया जाएगा?
इन चार नामों पर टिकी हैं निगाहें:
1. कौशलेंद्र विक्रम सिंह: फील्ड पर उनकी पकड़ और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता उन्हें अन्य से अलग बनाती है।
2. आशीष सिंह: इंदौर जैसे महानगरों में विकास कार्यों को जो गति उन्होंने दी, वह आज भी एक मिसाल है।
3. अनुराग चौधरी: कड़क मिजाज और नियमों के पक्के चौधरी राजस्व बढ़ाने के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं।
4. तरुण राठी: शांत रहकर बड़े लक्ष्यों को भेदने में माहिर, राठी का प्रशासनिक रिकॉर्ड बेदाग और तेज है।
विकास या गरीबी रेखा? फैसला मुख्यमंत्री के हाथ
मध्यप्रदेश के भविष्य का रोडमैप अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों में है। प्रदेश की जनता अब पुरानी और सुस्त कार्यप्रणाली से ऊब चुकी है। जनता चाहती है विकास, रोजगार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर। ऐसे में मुख्यमंत्री को यह तय करना होगा कि क्या वे इन ‘तेज तर्रार‘ आईएएस अधिकारियों को खुली छूट देकर प्रदेश का राजस्व बढ़ाएंगे, या फिर राजनीति के शतरंज में ये मोहरे लूप लाइन में ही धूल फांकते रहेंगे?
“अगर मध्यप्रदेश को आने वाले वर्षों में देश का नंबर-1 राज्य बनना है, तो शासन को उन अधिकारियों को कमान सौंपनी ही होगी जो सिस्टम को ‘अपडेट‘ और राजस्व को ‘अपग्रेड‘ कर सकें।”
वक्त है बदलाव का!
माइनिंग विभाग में आए राजस्व के उछाल ने शासन को एक ‘सक्सेस मंत्र‘ दे दिया है। अब बारी इसे पूरे प्रदेश के विभागों में लागू करने की है। क्या ‘मुखिया‘ अपने इन जांबाज अधिकारियों पर भरोसा जताएंगे? क्या मध्यप्रदेश की विकास दर अब रॉकेट की तरह ऊपर जाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।





