
शेयर बाजार में आई हालिया तेजी का असर देश की टॉप कंपनियों की वैल्यू पर साफ नजर आया। टॉप-10 सूचीबद्ध कंपनियों में से 6 कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹75,258 करोड़ बढ़ गया। इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान Tata Consultancy Services (TCS) का रहा, जो इस अवधि में टॉप गेनर के रूप में उभरी। निवेशकों की मजबूत खरीदारी और आईटी सेक्टर में पॉजिटिव सेंटिमेंट ने इस उछाल को सपोर्ट किया।
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, आईटी और चुनिंदा हैवीवेट शेयरों में आई तेजी के चलते इन कंपनियों के शेयर भाव बढ़े, जिससे उनका कुल मार्केट कैप ऊपर चला गया। TCS के अलावा अन्य बड़ी कंपनियों को भी फायदा हुआ, हालांकि कुछ कंपनियों की वैल्यू में सीमित गिरावट भी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल संकेतों में सुधार और घरेलू निवेशकों की भागीदारी से बाजार को मजबूती मिली।
अब सवाल यह है कि मार्केट कैप (Market Capitalization) होता क्या है। किसी कंपनी का मार्केट कैप उसके एक शेयर की कीमत को कुल जारी शेयरों की संख्या से गुणा करके निकाला जाता है। सरल शब्दों में, यह कंपनी की बाजार में कुल कीमत को दर्शाता है। जब शेयर का भाव बढ़ता है तो मार्केट कैप बढ़ता है और जब भाव गिरता है तो मार्केट कैप घट जाता है।
मार्केट कैप का बढ़ना आमतौर पर निवेशकों के भरोसे, बेहतर फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और मजबूत भविष्य की उम्मीदों का संकेत माना जाता है। वहीं, इसका घटना कंपनी के बिजनेस आउटलुक, मुनाफे या बाजार धारणा में कमजोरी की ओर इशारा कर सकता है। यही वजह है कि टॉप कंपनियों के मार्केट कैप में होने वाला उतार-चढ़ाव पूरे शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की सोच को दर्शाता है।

