
जमीन घोटाले के आरोपों से गरमाई मध्य प्रदेश की सियासत, शहडोल के प्रभारी मंत्री पर गंभीर आरोप
रीवा/भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। मामला जुड़ा है प्रदेश के कद्दावर नेता और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला से। रीवा के पूर्व पार्षद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विनोद शर्मा ने एक ऐसा मोर्चा खोला है, जिसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विनोद शर्मा सीधे EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) के दफ्तर जा पहुंचे और डिप्टी सीएम के खिलाफ करोड़ों के जमीन घोटाले की शिकायत दर्ज करा दी।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस नेता विनोद शर्मा का आरोप है कि शहडोल के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला के प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन के सौदों में बड़ी अनियमितताएं की गई हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि सरकारी तंत्र और पद का दुरुपयोग कर बेशकीमती जमीनों के बंदरबांट का खेल खेला गया है।
निष्पक्ष जांच पर बड़ा सवाल?
जनता के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक सिटिंग डिप्टी सीएम के खिलाफ जांच निष्पक्ष हो पाएगी?
● चुनौती: EOW राज्य सरकार के अधीन आती है, ऐसे में क्या विभाग अपने ही मंत्री के खिलाफ कड़े कदम उठा पाएगा?
● विपक्ष का तेवर: विनोद शर्मा और कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि अगर जांच में लीपापोती हुई, तो यह मामला कोर्ट तक जाएगा।
अगर घोटाला सच साबित हुआ, तो क्या होगा?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि EOW को प्राथमिक साक्ष्य मिलते हैं, तो:
● FIR दर्ज होगी: सबसे पहले मामले में आधिकारिक एफआईआर दर्ज की जा सकती है
● इस्तीफे का दबाव: नैतिक आधार पर विपक्ष डिप्टी सीएम के इस्तीफे की मांग तेज करेगा।
● सियासी भविष्य पर संकट: आने वाले चुनावों में यह मुद्दा भाजपा के लिए ‘गले की फांस‘ बन सकता है।
“यह केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग है। हमने सबूत EOW को सौंप दिए हैं, अब देखना है कि कानून अपना काम करता है या सत्ता के दबाव में झुक जाता है।” — विनोद शर्मा, पूर्व पार्षद (कांग्रेस)
यह मामला आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करेगा। क्या यह वाकई एक बड़ा घोटाला है या फिर महज राजनीतिक प्रतिशोध? इसका फैसला तो वक्त और जांच की रिपोर्ट ही करेगी, लेकिन फिलहाल रीवा से लेकर भोपाल तक की धड़कनें तेज हैं।


