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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एसपी साहब की ‘कैम्प ऑफिस’ वाली कार्यप्रणाली फिर चर्चा में है। दफ्तर में सन्नाटा और बंगले पर फाइलों का निपटारा, जानें क्या है।

सीधी एसपी साहब का पुराना अंदाज़लौटा, ऑफिस में सन्नाटा और बंगले से चल रही सरकार

सीधी, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे में इन दिनों एक बार फिर कैम्प ऑफिसवाली कार्यप्रणाली चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सीधी जिले के सीधी भर्ती (Direct Recruit) के एसपी साहब अपने पुराने रंग में लौट आए हैं। हालात यह हैं कि जिला पुलिस कार्यालय (SP Office) में अब उनकी मौजूदगी कम ही दिखाई देती है।

बंगले को बनाया कैम्प ऑफिस‘, फाइलों का घर से ही निपटारा

ताजा जानकारी के अनुसार, एसपी साहब ने अब सप्ताह में केवल एकदो दिन ही मुख्य कार्यालय जाना मुनासिब समझा है। उनके कामकाज का अधिकांश संचालन अब शासकीय आवास (बंगले) पर बने कैम्प ऑफिस से ही हो रहा है। बताया जा रहा है कि ज्यादातर फाइलों और प्रशासनिक कार्यों का निपटारा वे अपने बंगले से ही करना पसंद कर रहे हैं। जिला कार्यालय का रुख वे तभी करते हैं जब कोई बहुत ही अति आवश्यकया वीआईपी काम हो।

पुरानी आदत या कार्यशैली?

दिलचस्प बात यह है कि यह एसपी साहब की कोई नई कार्यशैली नहीं है। इससे पहले वे जिस जिले में पदस्थ थे, वहां भी उनका यही स्टाइलरहा थायानी ऑफिस में उपस्थिति कम और बंगले से कमांड ज्यादा। पुलिस महकमे के गलियारों में अब यह चर्चा आम हो गई है कि साहब की फाइलों का निपटारा भले ही समय पर हो रहा हो, लेकिन मुख्य कार्यालय की रौनक अब पहले जैसी नहीं रही।

अफसरशाही में उठ रहे हैं सवाल

एसपी साहब के इस रवैये को लेकर मध्य प्रदेश ब्यूरोक्रेसी और पुलिस विभाग में तरहतरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। ऑफिस में फरियादियों और अधीनस्थ अधिकारियों की कम उपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि जब मुखिया ही दफ्तर में नहीं बैठेंगे, तो निचले स्तर के कर्मचारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

प्रमुख बिंदु (Quick Highlights):

 

  • सीधी भर्ती के एसपी: कार्यशैली को लेकर चर्चा में।
  • कैम्प ऑफिस: बंगले से हो रहा है सरकारी काम।
  • पुरानी आदत: पिछले जिले में भी रहा है यही रिकॉर्ड।
  • ऑफिस का सन्नाटा: जिला कार्यालय में रौनक गायब।

 

gaurav
Author: gaurav

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