प्रदेश कैडर से सेवानिवृत्त सीधी भर्ती आईपीएस अधिकारी की पुत्री, जो वर्तमान में राजस्थान के एक जिले में कलेक्टर पद पर पदस्थ हैं, इन दिनों अपनी एक अभिनव और दूरदर्शी पहल को लेकर चर्चा में हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उनके प्रयासों ने सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए नई राह खोल दी है।
सूत्रों के अनुसार, जिले के सरकारी विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर मैडम ने एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य पर ध्यान दिया—
अधिकांश छात्र गणित और विज्ञान को केवल इसलिए कठिन मान रहे थे, क्योंकि उनकी मौलिक अवधारणाएं कमजोर थीं।
मेडम ने इस समस्या को केवल चिन्हित कर छोड़ नहीं दिया, बल्कि इसका व्यावहारिक और स्थायी समाधान खोज निकाला। उन्होंने जिले के सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित मैथ्स प्रैक्टिस वेबसाइट विकसित करवाने का निर्णय लिया।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्र अब इंटरएक्टिव अभ्यास, चरणबद्ध प्रश्नों और स्वयं मूल्यांकन की सुविधा के साथ गणित का अभ्यास कर पा रहे हैं। नतीजा यह है कि धीरे-धीरे छात्रों का डर कम हो रहा है, आत्मविश्वास बढ़ रहा है और विज्ञान विषयों में भी रुचि विकसित हो रही है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस अभिनव पहल का सकारात्मक प्रभाव इतना व्यापक रहा कि इसकी गूंज जयपुर तक पहुंच चुकी है। राज्य सरकार ने भी इस नवाचार की खुलकर सराहना की है और इसे अन्य जिलों में लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
शिक्षाविदों का मानना है कि यह पहल न केवल डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को साकार करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और तकनीक का सही उपयोग किया जाए, तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन संभव है।
कलेक्टर मैडम की यह पहल यह सिद्ध करती है कि
“जब संवेदनशीलता, तकनीक और प्रशासन एक साथ आते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।”

