
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक अहम निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निगम शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा उपकर और शहरी विकास उपकर की वसूली नहीं कर सकता। यह फैसला निजी स्कूलों की याचिका पर सुनवाई के बाद आया, जिसमें स्कूलों ने नगर निगम द्वारा लाखों रुपये की वसूली के नोटिस को चुनौती दी थी। कोर्ट ने न केवल वसूली के आदेश को निरस्त किया, बल्कि निगम को निर्देश दिया कि दो माह में जमा की गई राशि स्कूलों को लौटाई जाए इस फैसले से राज्यभर के निजी शैक्षणिक संस्थानों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से इस उपकर को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। कोर्ट ने माना कि शिक्षा और शहरी विकास उपकर जैसे कर शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होते, क्योंकि ये संस्थान लाभ के उद्देश्य से नहीं चलाए जाते और इनका उद्देश्य समाज में शिक्षा का प्रसार करना है। नगर निगम द्वारा इन संस्थानों पर कर लगाने की कार्रवाई को कोर्ट ने असंवैधानिक और अनुचित करार दिया।
इस निर्णय के बाद अब नगर निगम को पूर्व में वसूली गई राशि को समायोजित करने और वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती। यह फैसला न केवल इंदौर बल्कि पूरे राज्य के स्कूलों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, क्योंकि इससे शिक्षा संस्थानों की वित्तीय स्वतंत्रता और संचालन में राहत मिलेगी।

