
साल 2025 में जहां Foreign Institutional Investors (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से धीरे-धीरे दूरी बनानी शुरू की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभालकर रखने में अहम भूमिका निभाई। लगातार FII आउटफ्लो के बावजूद भारतीय बाजारों में बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली, जिसका श्रेय घरेलू फंड्स को दिया जा रहा है।
FII क्यों कर रहे हैं भारत से निकासी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, FIIs की बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारण रहे:
- अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
- वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका
- डॉलर में मजबूती और उभरते बाजारों से पूंजी का पलायन
- जियोपॉलिटिकल तनाव और ट्रेड पॉलिसी को लेकर चिंता
इन वजहों से विदेशी निवेशकों ने 2025 में रिस्क कम करने की रणनीति अपनाई।
🇮🇳 घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा
FIIs की निकासी के बीच म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और रिटेल निवेशकों ने बाजार में भरोसा बनाए रखा:
- SIP के जरिए लगातार निवेश
- लॉन्ग-टर्म ग्रोथ थीम पर फोकस
- बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स में खरीदारी
- बाजार गिरावट को निवेश का मौका मानना
इससे भारतीय बाजारों में स्थिरता बनी रही।
मार्केट पर क्या दिखा असर?
- इंडेक्स में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन भारी गिरावट नहीं आई
- मिड-कैप और स्मॉल-कैप में घरेलू निवेश का असर दिखा
- वॉल्यूम में घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी बढ़ी
विशेषज्ञ मानते हैं कि घरेलू निवेशकों की मजबूत मौजूदगी ने बाजार को वैश्विक झटकों से बचाया।
आगे का रास्ता
एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर घरेलू निवेश का यह ट्रेंड जारी रहा, तो भारतीय बाजार:
- FII की वापसी तक खुद को संभाले रख सकते हैं
- लॉन्ग-टर्म में मजबूत ग्रोथ दिखा सकते हैं
- वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद आकर्षक बने रहेंगे
2025 में FII की बिकवाली के बीच घरेलू फंड्स भारतीय शेयर बाजार के लिए सुरक्षा कवच बनकर उभरे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि अब भारतीय बाजार सिर्फ विदेशी पूंजी पर निर्भर नहीं, बल्कि घरेलू निवेश की ताकत से भी आगे बढ़ रहा है |

