
चीन ने हाल ही में “Settling Hotspots” यानी वैश्विक तनाव वाले क्षेत्रों को शांत करने से जुड़े बयान में भारत-पाकिस्तान संबंधों का भी जिक्र किया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में भूमिका निभाई थी।
बीजिंग की ओर से कहा गया कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और संवाद के ज़रिए विवादों को सुलझाना ही सबसे बेहतर रास्ता है। हालांकि चीन ने किसी एक देश का नाम लेकर श्रेय लेने से बचते हुए संतुलित रुख अपनाया।
China का रुख क्या कहता है?
चीन ने साफ किया कि एशिया में शांति और स्थिरता उसके लिए प्राथमिकता है। “Settling Hotspots” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए चीन ने संकेत दिया कि वह उन क्षेत्रों में तनाव कम करने का समर्थन करता है, जहाँ लंबे समय से राजनीतिक या सैन्य टकराव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से India-Pakistan संबंधों की ओर इशारा करता है, जो दशकों से संवेदनशील बने हुए हैं।
🇺🇸 Trump का दावा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उनके प्रयासों से भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बिगड़ने से बचे। हालांकि भारत की ओर से पहले भी यह स्पष्ट किया गया है कि दोनों देशों के मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।
चीन का ताजा बयान ट्रंप के दावे की न तो खुली पुष्टि करता है और न ही सीधा खंडन, बल्कि वह इसे एक व्यापक वैश्विक शांति के संदर्भ में रखता है।
क्या बदल रहे हैं क्षेत्रीय समीकरण?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बड़े देश अब खुले टकराव की बजाय कूटनीतिक भाषा और संतुलित बयानों के ज़रिए अपनी स्थिति साफ कर रहे हैं। चीन का यह रुख यह दिखाता है कि वह दक्षिण एशिया में स्थिरता चाहता है, लेकिन किसी एक पक्ष के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आना चाहता।
निष्कर्ष
“Settling Hotspots” पर चीन का बयान यह संकेत देता है कि वैश्विक शक्तियाँ अब तनाव घटाने की बात कर रही हैं, न कि उसे और बढ़ाने की। ट्रंप के India-Pakistan truce वाले दावे के बीच चीन की यह प्रतिक्रिया कूटनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय शांति की अहमियत को रेखांकित करती है

