
आने वाले महीनों में स्मार्टफोन और पर्सनल कंप्यूटर (PC) खरीदना आम उपभोक्ताओं के लिए महंगा साबित हो सकता है। टेक इंडस्ट्री से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की भारी कमी पैदा हो रही है, जिसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमतों पर पड़ेगा। अनुमान है कि कई प्रमुख डिवाइस की कीमतें 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
AI आधारित सर्वर, डेटा सेंटर्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम्स के लिए बड़ी मात्रा में DRAM और NAND मेमोरी की जरूरत होती है। कंपनियां अब ज्यादा मुनाफे वाले AI सेगमेंट को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे स्मार्टफोन और PC जैसे उपभोक्ता उत्पादों के लिए मेमोरी की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। इस असंतुलन के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है और मेमोरी की लागत लगातार ऊपर जा रही है।
मेमोरी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे मोबाइल कंपनियों और कंप्यूटर निर्माताओं की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियों के पास या तो मुनाफा घटाने का विकल्प है या फिर बढ़ी हुई लागत को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर ब्रांड कीमतें बढ़ाने का रास्ता अपनाएंगे, जिससे मिड-रेंज और प्रीमियम स्मार्टफोन, लैपटॉप और PC और महंगे हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति तब तक बनी रह सकती है जब तक मेमोरी उत्पादन पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाता। AI टेक्नोलॉजी में निवेश लगातार बढ़ रहा है और इसके चलते पारंपरिक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को दबाव झेलना पड़ रहा है। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को नए डिवाइस खरीदने के लिए ज्यादा बजट तैयार रखना पड़ सकता है।

