
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से जुड़ा मामला और गंभीर हो गया है। शहर में इस वजह से 17वीं मौत की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित भागीरथपुरा क्षेत्र में हालात पर काबू पाने के लिए बड़े स्तर पर मेडिकल जांच अभियान चलाया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में अब तक 9,416 लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इस दौरान 20 नए मरीज सामने आए हैं, जिनमें दूषित पानी से होने वाली बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं। मरीजों में उल्टी, दस्त, बुखार और पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं देखी जा रही हैं। प्रभावित लोगों को सरकारी और निजी अस्पतालों में निगरानी में रखा गया है।
प्रशासन का कहना है कि दूषित जल आपूर्ति के स्रोत की पहचान कर ली गई है और पाइपलाइन की सफाई व मरम्मत का काम तेज़ी से किया जा रहा है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिसमें मौतों, मरीजों की संख्या और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का पूरा ब्योरा शामिल होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है, और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस सुधार जरूरी हैं।

