
ईरान इस समय भीषण सामाजिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। देश के करीब 100 शहरों में महंगाई के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव से नाराज लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे हालात तेजी से बेकाबू होते नजर आ रहे हैं।
प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर हिंसा भड़कने की खबरें सामने आई हैं। एक झड़प में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने सख्ती बढ़ा दी। अब तक की जानकारी के मुताबिक, देशभर में हुई झड़पों और कार्रवाई में कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने तेहरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसके साथ ही, देश के कई हिस्सों में इंटरनेट और फोन सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, ताकि सूचनाओं के प्रसार और प्रदर्शनकारियों के समन्वय को रोका जा सके। इन कदमों से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन केवल महंगाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक असंतोष और शासन के खिलाफ गुस्से का प्रतीक बन चुका है। हालात किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाले दिनों में सरकार की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल, ईरान में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और पूरी दुनिया की नजर इस संकट पर टिकी हुई है।

