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एमपी की सियासत में ‘दिग्गजों’ का सूर्यास्त? क्या खत्म हो गया शिवराज, तोमर, प्रहलाद पटेल और विजयवर्गीय का ‘पावर गेम’!

भोपाल/नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के भीतर क्या एक नए युग का आगाज हो चुका है? क्या मध्य प्रदेश की राजनीति के वो चेहरे, जिनकी मर्जी के बिना कभी भोपाल में पत्ता भी नहीं हिलता था, अब हाशिए पर धकेले जा रहे हैं? ये सवाल आज हर सियासी गलियारे में गूंज रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेलये वो नाम हैं जिन्होंने दशकों तक प्रदेश की सत्ता और संगठन पर राज किया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

1. ‘मामाका राजभवन से विदाई और नई भूमिका

लगातार 18 साल तक प्रदेश की कमान संभालने वाले शिवराज सिंह चौहान के लिए लाड़ली बहनायोजना गेम चेंजर साबित हुई, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर कर दिल्ली की राजनीति में भेज दिया। हालांकि वह केंद्र में कृषि मंत्री हैं, लेकिन प्रदेश की सत्ता में अब उनका दबदबापहले जैसा नहीं रहा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के आने के बाद, शिवराज युग की मनमानीऔर उनके करीबियों का वर्चस्व धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है।

2. ‘दिल्ली दरबारसे सीधे मैदानमें उतरे दिग्गज

नरेंद्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल जैसे कद्दावर नेता, जो कभी दिल्ली में बैठकर बड़ी नीतियां तय करते थे, उन्हें विधानसभा चुनाव में उतारकर पार्टी ने संकेत दे दिया था कि अब चेहरोंसे बड़ा संगठनहै।

  • नरेंद्र सिंह तोमर: विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए, जो एक तरह से सक्रिय पावर पॉलिटिक्स से सम्मानजनक विदाईमानी जा रही है।
  • प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय: कैबिनेट मंत्री तो बने, लेकिन मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर होने के बाद उनकी राजनीतिक धार अब वैसी नहीं रही जैसी कभी हुआ करती थी।

क्या नये युगका निर्माण हो गया है?

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व (मोदी-शाह की जोड़ी) ने मध्य प्रदेश में पीढ़ी परिवर्तन‘ (Generation Shift) का जो प्रयोग किया है, उसने पुराने दिग्गजों के पैर उखाड़ दिए हैं। अब पार्टी में:

1.      व्यक्ति पूजा का अंत: अब नेता नहीं, बल्कि कमल का फूलऔर मोदी की गारंटीसर्वोपरि है।

2.      अनुशासन का हंटर: अब कोई भी दिग्गज नेता अपनी शर्तों पर पार्टी को नहीं झुका पा रहा है।

3.      अनसुना करने की रणनीति: कई मौकों पर देखा गया है कि इन दिग्गजों की सिफारिशों को दरकिनार कर नए चेहरों को तरजीह दी जा रही है।

जनता की राय और भविष्य की राजनीति

मध्य प्रदेश की जनता अब विकास और नए विजन की ओर देख रही है। हालांकि इन नेताओं का अपना एक वोट बैंक है, लेकिन युवा पीढ़ी और नए कार्यकर्ताओं के बीच मोहन यादव सरकार की स्वीकार्यता बढ़ रही है। बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी नेता को पार्टी से बड़ा होने की अनुमति नहीं देगी।

यह कहना जल्दबाजी होगी कि इनका अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है, लेकिन यह निश्चित है कि उनकी पावर पॉलिटिक्सका स्वर्ण युग अब समाप्त हो चुका है। बीजेपी अब एक ऐसे दौर में है जहाँ अनुभवको सम्मान तो मिल रहा है, लेकिन कमानपूरी तरह नए और ऊर्जावान हाथों में सौंप दी गई है।

gaurav
Author: gaurav

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