
भोपाल। मध्य प्रदेश में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (GIS) के दौरान राज्य सरकार को 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार का दावा है कि इन निवेशों से प्रदेश में उद्योग, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे प्रदेश के आर्थिक विकास की दिशा में “ऐतिहासिक कदम” बताया है।
हालांकि, इन भारी-भरकम निवेश प्रस्तावों को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या ये प्रस्ताव जमीनी स्तर पर उतर पाएंगे या फिर पहले की तरह केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगे।
किन सेक्टर्स में आया निवेश प्रस्ताव?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, निवेश प्रस्ताव मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में आए हैं:
- मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल यूनिट्स
- कृषि आधारित उद्योग और फूड प्रोसेसिंग
- रिन्यूएबल एनर्जी और पावर सेक्टर
- आईटी, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों में निवेश से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
निवेश प्रस्ताव बनाम जमीनी हकीकत
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश प्रस्ताव मिलना एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन असली चुनौती है:
- जमीन आवंटन
- मंजूरी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता
- नौकरशाही की भूमिका
- छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को अवसर
पहले भी कई इन्वेस्टर समिट में बड़े निवेश प्रस्ताव सामने आए थे, लेकिन उनमें से कई परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पाईं।
रोजगार को लेकर उम्मीदें और आशंकाएं
सरकार का दावा है कि इन निवेशों से लाखों नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि जब तक:
- स्थानीय उद्यमियों को संरक्षण
- आसान टेंडर और नीति
- भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
नहीं होगा, तब तक निवेश का लाभ आम लोगों तक पहुंचना मुश्किल रहेगा।
क्या बदलेगी MP की तस्वीर?
30.77 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब सरकार घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस क्रियान्वयन पर ध्यान दे। वरना यह निवेश आंकड़ा भी प्रदेश के लिए एक “बोझिल प्रस्ताव” बनकर रह जाएगा।

