Senior IAS Officers Still Waiting for Posting – वरिष्ठ IAS अफसर अभी भी पोस्टिंग के इंतज़ार में

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटे दो वरिष्ठ IAS अफसर इन दिनों प्रशासनिक देरी और अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। लगभग एक माह पहले ही वे वापस आए हैं, लेकिन अभी तक दोनों को कोई ठोस पोस्टिंग नहीं मिली है। फाइलें चल रही हैं, चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन नतीजा अभी दूर नजर आता है। इस बीच अफसरों में बेचैनी और बेचैनियों के बारे में बातें सामने आ रही हैं।

सूत्र बताते हैं कि सरकार फिलहाल उन दोनों में से एक अफसर को लूप‑लाइन माने जाने वाले किसी संस्थान में एडजस्ट करने पर विचार कर रही है। लूप‑लाइन से तात्पर्य इस तरह के पद या इकाई से है जहाँ पर सीधे प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल कम होता है, या वैकल्पिक तौर पर किसी व्यवस्थागत पुनर्व्यवस्था की प्रक्रिया होती है। चर्चा यह भी है कि आने वाले सात–आठ महीनों में कुछ वरिष्ठ अधिकारी रिटायर होने वाले हैं, और उनकी जगह के लिए यही दोनों अफसर टक्कर में माने जा रहे हैं।

 

हालांकि, अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे दोनों अफसरों को राहत नहीं मिल रही। उन्हें यह सुनने को मिल रहा है कि जहाँ देना हो, दे दीजिए, पर साथ ही जल्द निर्णय करने का अनुरोध भी किया जा रहा है। रिटायरमेंट की समयरेखा और वरिष्ठ पदों की खाली होने की स्थिति प्रशासनिक निर्णय को और संवेदनशील बना देती है। पंजाब जैसे अन्य राज्यों में भी कई IAS अफसरों की रिटायरमेंट या पोस्टिंग इंतज़ार की खबरें आ रही हैं, जो पूरे प्रशासनिक तंत्र में पोस्टिंग‑समस्याओं के बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

यह मामला नियमों, पारदर्शिता और समय पर निर्णय की जरूरत को उजागर करता है। जब दो वरिष्ठ अफसर लंबे समय तक पोस्टिंग के बिना रह जाते हैं, तो न केवल उनके करियर पर असर पड़ता है बल्कि विभागीय कामकाज और शासन के संचालन पर भी प्रश्न उठते हैं। ऐसे समय में सरकार और संबंधित विभागों के लिए आवश्यक है कि वे ठोस, तेज़ और उचित प्रक्रिया से पोस्टिंग निर्णय लें, ताकि अफसरों को भावनात्मक और पेशेवर दोनों स्तर पर स्थिरता मिल सके। अफसरों की यही गुज़ारिश है—स्थान तय कर दें, लेकिन जल्द कर दें।

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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