
मध्य प्रदेश ने पिछले बीस वर्षों में विकास की जो गति पकड़ी है, उसने राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा कर दिया है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए इस राज्य ने अपनी स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश करते हुए एक नई पहचान बनाई है — आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश अब विरासत से विकास की ओर बढ़ चुका है, और यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत निर्माण के संकल्प से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की विकास गाथा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर आधारित है।
पिछले दो दशकों में राज्य ने सड़क, सिंचाई, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक निवेश जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। दुग्ध उत्पादन, कृषि निर्यात, स्टार्टअप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने प्रदेश को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने ब्लॉग में लिखा कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना है। इसके लिए युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच को प्राथमिकता दी जा रही है।
यह विकास यात्रा न केवल आंकड़ों की कहानी है, बल्कि यह प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं, मेहनत और सरकार की दूरदृष्टि का परिणाम है। मध्य प्रदेश अब सिर्फ एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि विकास और नवाचार का प्रतीक बन चुका है।

