
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबी बातचीत के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बन गई है, जिससे देश में मर्सिडीज, BMW, ऑडी और अन्य यूरोपीय कारें सस्ती होने की दिशा में अग्रसर होंगी। नए समझौते के तहत भारत पहले 110% तक लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को क्रमिक रूप से घटाकर लगभग 10% तक लाने का निर्णय लिया है। इससे लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट की कारों की कीमतों में लाखों रुपये तक की कमी संभव है, खासकर उन मॉडलों पर जो अब तक भारी टैक्स के कारण महंगे बिकते थे।
यह ऐतिहासिक समझौता 18 साल से चली आ रही चर्चा के बाद हुआ है और भारत-EU के व्यापार को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। फ्री ट्रेड डील के तहत सालाना लगभग 2.5 लाख यूरोपीय-निर्मित वाहन पर नई कम ड्यूटी लागू होगी, जिससे वैश्विक बाजार में यूरोपीय कार निर्माता भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच हासिल कर सकते हैं। शुरुआत में कटौती 40% तक हो सकती है और समय के साथ इसे 10% तक ले जाया जाएगा।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केवल लग्जरी सेगमेंट तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समग्र ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी मदद करेगा। हालांकि, इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा क्योंकि ड्यूटी में कटौती क्वोटा-आधारित है और लागू होने के बाद भी मार्जिन, स्थानीय कर और वैरीश्न के आधार पर कीमतों में उतनी गिरावट नहीं आ सकती है जितनी उपभोक्ता उम्मीद कर रहे हैं। यूरोपीय निर्माताओं के लिए यह अवसर भारतीय बाजार में अधिक मॉडल लाने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का एक बड़ा मंच प्रदान करेगा।
इस बड़े समझौते से सिर्फ कार ही सस्ती नहीं होंगी, बल्कि EU से आयात होने वाले वाइन, दवाइयां, चॉकलेट, मशीनरी और अन्य कई उपभोक्ता वस्तुएं भी कम टैक्स दरों का लाभ उठाएंगी। सरकार का कहना है कि यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भारत-EU व्यापार को नई गति देगा और दोनों के बीच आर्थिक व वाणिज्यिक साझेदारी को मजबूत करेगा









