
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर अपनी तकनीकी दक्षता और मिशन पर नियंत्रण का शानदार प्रदर्शन किया है। 3 नवंबर 2025 को खराब मौसम और तेज हवाओं के बावजूद LVM3 रॉकेट ने सफलतापूर्वक एक महत्वपूर्ण सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया, जिससे भारत की अंतरिक्ष शक्ति को एक और मजबूती मिली है।
लॉन्च श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से हुआ, जहां मौसम विभाग ने पहले ही तेज हवाओं और बादलों की चेतावनी जारी की थी। इसके बावजूद ISRO की लॉन्च टीम ने सटीक समय पर रॉकेट को लॉन्च किया, और मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह सैटेलाइट भारत के संचार और मौसम निगरानी तंत्र को और अधिक सशक्त बनाएगा।
LVM3, जिसे पहले GSLV Mk III के नाम से जाना जाता था, ISRO का सबसे भारी और शक्तिशाली रॉकेट है। इस मिशन में इसकी तीन चरणों वाली प्रणाली और क्रायोजेनिक इंजन ने खराब मौसम के बावजूद स्थिरता बनाए रखी और सैटेलाइट को सटीक जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया।
ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ ने मिशन की सफलता पर टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह मिशन दर्शाता है कि भारत की अंतरिक्ष तकनीक अब किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटती। मौसम की बाधाएं हों या तकनीकी जटिलताएं, हमारी टीम हर बार नया इतिहास रचती है।”
यह सफलता न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में बढ़ती भूमिका का प्रतीक भी है। आने वाले महीनों में ISRO कई और अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिससे भारत की अंतरिक्ष सेवाओं को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी।

